बिलासपुर । मरवाही में तस्वीर अब साफ होने लगी है । भाजपा और भाजपा के दो डाक्टरों के बीच से अमित जोगी जो 16 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करेंगे , को सकुशल बाहर निकलने की चुनौती होगी तो पिछले चुनाव में जमानत जब्त करा 3 रे नंबर पर रहे कांग्रेस को भाजपा और अमित जोगी को पीछे छोड़ एक नंबर में आने सत्ता के तरकश को कमान से बाहर निकालने की मज़बूरी भी रहेगी वहीं सत्ता से बाहर हो चुकी भाजपा के लिए भी यह चुनाव कश्मकश से कम नहीं रहेगी । मरवाही विधानसभा के उप चुनाव के लिए प्रत्याशियों की घोषणा हो जाने के बाद चुनावी तस्वीर लगभग स्पष्ट हो चुकी है अब वहां के मतदाताओं की बारी है कि वे किसको चुनेंगे ।
बड़ा सवाल तो यह है कि क्या मतदाता स्व अजीत जोगी को इतनी जल्दी भुला देंगे या फिर सहानुभूति की लहर में बह जायेंगे? पिछले चुनाव में भाजपा दूसरी तो कांग्रेस 3री नंबर पर थी ।अजीत जोगी ने कुल डाले हुए मतों में 50 प्रतिशत वोट पाकर बता दिया था कि मरवाही की जनता जोगी परिवार से कभी बाहर नहीं जायेगी लेकिन उनके निधन के बाद राजनैतिक समीकरण तेजी से बदला है । राज्य में कांग्रेस की सरकार तो अजीत जोगी के जीते जी बन चुका था मगर उनके निधन के बाद कांग्रेस और भूपेश बघेल की सरकार ने मरवाही क्षेत्र में अपना पूरा ध्यान केन्द्रित कर इस उपचुनाव को जीतने के लिए सब कुछ करने की कोशिश की यह जानते हुए भी कि पिछले चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन बेहद ख़राब था मगर श्री जोगी के निधन के बाद कांग्रेस को मरवाही क्षेत्र में फिर से स्थापित करने बीते 3 माह में काफी कुछ किया गया ।
नए जिले का निर्माण तो सिर्फ एक झांकी था । उधर सत्ता से बाहर हो चुकी भाजपा के नेताओ ने भी मरवाही की दौड़ लगाना शुरू किया । बैठको का दौर चला और भाजपा नेताओ ने दो काम किए एक तो प्रत्याशी के दावेदारों की सूची बनाई और जिसे प्रत्याशी बनाना था उसके नाम की घोषणा दिल्ली से हो ग ई । डॉ गंभीर सिंह भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी बना दिया ग या। टिकट की उम्मीद पाले पूर्व पराजित प्रत्याशियों को भाजपा ने कोई भाव नहीं दिया यहां तक कि मरवाही से भाजपा के विधायक रहे रामदयाल उ इके को भी टिकट न देकर यह अहसास करा दिया कि उसी ने अजीत जोगी के लिए मरवाही की सीट खाली कर भाजपा की अच्छी खासी किरकरी करवाई थी । यह कटु सत्य है कि रामदयाल उईके कभी विश्वनीय नहीं रहे इसी का प्रतिफल उसे आज मिल रहा है ।
अजीत जोगी के लिए विधायकी त्याग देने वाले उइके ने जोगी का साथ छोड़ कांग्रेस में ही रहे मगर पिछले चुनाव में एनवक्त पर भाजपा में शामिल तो हो ग ये मगर दलबदलु उइके को जनता ने सबक सीखा दिया । भाजपा ने इसी लिए उसे उपचुनाव में प्रत्याशी नहीं बनाया और नए चेहरे पर दांव लगाया है । भाजपा ने जब डाक्टर तो प्रत्याशी बनाया तो कांग्रेस ने भी डॉ के के ध्रुव को सरकारी नौकरी से इस्तीफा दिलवाकर चुनाव मैदान में उतार दिया है । डॉ ध्रुव के समर्थन में कांग्रेस के 50 विधायक तो प्रचार करेंगे ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल,प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष मोहन मरकाम प्रभारी मंत्री जय सिंह अग्रवाल विधायक शैलेष पाण्डेय मोहित केरकेट्टा ,प्रदेश उपाध्यक्ष अटल श्रीवास्तव प्रवक्ता अभय नारायण राय ,प्रदेश महामंत्री अर्जुन तिवारी के साथ ही कई मंत्री और पार्टी के प्रदेश स्तर के पदाधिकारी , महिला कांग्रेस की नेत्रियों के साथ ही पार्टी के तमाम आनुषंगिक संगठन के नेता भी चुनाव प्रचार में जुटेंगे तो भाजपा भी नेता प्रतिपक्ष , धरम कौशिक ,पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल महामंत्री भूपेन्द्र स्वन्नी के साथ ही बिलासपुर और कोरबा जिले के तमाम पदाधिकारी मंडल स्तर के नेता भी मरवाही में डटे रहेंगे । रही बात अमित जोगी की तो वे राजनीति अपने दिवंगत पिता से सीखे है ।अजीत जोगी तो कुछ मुरव्वत भी करते थे मगर अमित जोगी में वो बात नहीं है । वे अपने पिता के निधन के फल सवरूप उपजी सहानुभूति को एन केव ल जिन्दा रखना चाहते है बल्कि पूरे चुनाव में उसे पूरी तरह भुनाने का माद्दा भी रखते है जिसकी शुरुवात उन्होंने अजीत जोगी के निधन के बाद से ही कर दिया था । जाति प्रमाण पत्र का मसला भी उसी रणनीति का हिस्सा है । अपनी धर्मपत्नी ऋचा जोगी की जाति का प्रमाणपत्र बनवाना और सारे लोगो का ध्यान आकर्षित कर उन्हें उसमे ही व्यस्त रखने का काम भी एक सोची समझी रणनीति है ताकि मरवाही क्षेत्र की जनता ही नहीं पूरे प्रदेश में यह संदेश जाए कि सरकार और प्रशासन जोगी परिवार को चुनाव लडने देना नहीं चाहती । वैसे भी अजीत जोगी के दिवंगत होने के बाद बिना जोगी परिवार के मरवाही उपचुनाव नीरस हो जायेगा । अमित जोगी की जाति को लेकर उपजे सवाल और न्यायालयीन कारवाई का नतीजा तो बाद में पता चलेगा मगर भाजपा के नेताओ द्वारा द्वारा अमित जोगी और उनकी पत्नी के प्रति सहानुभूति जताना और यह कहना कि अजीत जोगी जब मरवाही से प्रथम चुनाव लड़ सकते है तो उनके पुत्र और पुत्रवधू को उनकी जाति प्रमाण पत्र पर सवाल उठा चुनाव लडने से रोकने की कोशिश उचित नहीं है ,भाजपा की सोची समझी रणनीति का हिस्सा है ।एक तरह से भाजपा अमित जोगी का अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन करते दिख रही है चुनाव के नतीजे चाहे जो भी हो ।