बिलासपुर । कोरोना वायरस की भयावहता से पूरा देश त्राहिमाम कर रहा है । छत्तीसगढ़ में भी स्थिति काफी गंभीर है तथा पूरे प्रदेश में लॉकडाउन प्रभावित है लेकिन आश्चर्य है कि धान संग्रहण केंद्रों में लॉकडाउन के आदेश का खुला उल्लंघन हो रहा है ।
यह सही है कि धान संग्रहण केंद्रों में पडे लाखों बोरा धान का उठाव जरूरी है लेकिन परिवहन के काम में जहां हमाल और मजदूर काम करते हैं वहां तो लॉक डाउन का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए यही नहीं धान का ट्रांसपोर्ट यदि अति जरूरी है तो ऐसी स्थिति में मास्क, सैनिटाइजर तथा सोशल डिस्टेंस का कड़ाई से पालन होना चाहिए मगर बिलासपुर के धान संग्रहण केंद्रों में लॉकडाउन के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही है भले ही आज रविवार होने के कारण धान संग्रहण केंद्रों में काम बंद है लेकिन रविवार को छोड़ अन्य कार्य दिवस में सैकड़ों की संख्या में हमाल तथा डीलरों के मुंशी व कर्मचारी काम कर रहे हैं एवं आने वाले ट्रकों के धान का लोडिंग कर रहे हैं इस दौरान ना वहां सेनीटाइजर है और नहीलोग वहां मास्क लगा रहे हैं ।यही नहीं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी बिल्कुल नहीं हो रहा है।
जानकारी के मुताबिक बिलासपुर जिले में बिल्हा, सेमरताल ,मोपका ,कोटा और भरनी में धान संग्रहण केंद्र है जहां मिलरो के लिए धान का उठाव किया जा रहा है ।प्रत्येक केंद्र में 100 से भी अधिक हमाल काम कर रहे हैं और वहां किसी को भी मास्क पहने हुए नहीं देखा गया हालांकि कई धान केंद्रों में 80% धान का ट्रांसपोर्टिंग हो चुका है सिर्फ 20% धान बचा है जिसे बाद में भी ट्रांसपोर्टिंग किया जा सकता था। लॉक डाउन की स्थिति को देखते हुए इन धान संग्रहण केंद्रों मैं काम बंद रखा जाना चाहिए था ।इन केंद्रों में लॉकडाउन का पालन नहीं हो रहा है ।एक संग्रहण केंद्र में 7 टोलियां है ।एक ट्रक में कम से कम 15 लोग धान लोडिंग ट्रको में करते हैं ।स्वभाविक है इन सबके बीच में लापरवाही के चलते कोरोनावायरस तेजी से फैलने की आशंका है ।यह भी उल्लेखनीय है कि ट्रांसपोर्टिंग करने वाले ठेकेदारों को पिछले 4 माह से भुगतान नहीं हुआ है। ठेकेदार भी धान का ट्रांसपोर्टिंग करने तैयार नहीं थे तथा लॉक डाउन के बाद ही काम करने के पक्ष में थे मगर प्रशासन और खाद्य विभाग के दबाव के चलते ट्रांसपोर्टिंग के पास धड़ाधड़ जारी किये गये । ट्रक में लोड करने वाले हमाल भी नहीं चाहते थे। लेकिन दबाव के चलते मिलरों का धान जल्द उठाने के लिए लॉक डाउन की परवाह नहीं की जा रही ।
जानकारी के मुताबिक मोपका धान संग्रहण केंद्र में तो धान का उठाव हो चुका है लेकिन भरनी संग्रहण केंद्र में जमा धान को पूरी तरह ट्रांसपोर्टिंग करने में लगभग 1 माह लग जाएगा ट्रांसपोर्टिंग करने वाले ठेकेदारों ने लॉकडाउन के पहले बैंक तथा ऑफिस बंद होने का हवाला देते हुए यह कहकर काम बंद करा दिया था कि मजदूरों को भुगतान में दिक्कत आएगी मगर खाद्य विभाग विपणन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों के दबाव से जबरिया धान संग्रहण केंद्र में सुबह 7:00 बजे से 9:00 बजे तक एवं दोपहर 3:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक आने वाले ट्रकों में धान की लोडिंग की जा रही है। लगभग 150 मजदूर काम कर रहे हैं। स्टाफ , मिलरो के मुंशी वी हमालों को मिलाकर लगभग 200 लोग धान संग्रहण केंद्र में काम करते हुए कोरोना महामारी बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं कहे तो अतिशयोक्ति नहीं होगी ।
इस संबंध में जिला विपणन अधिकारी गजेंद्र सिंह राठौर से बात करने की कोशिश की गई तो उनका मोबाइल लगातार व्यस्त बता रहा था सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि लॉक डाउन में भी धान संग्रहण केंद्रों से धान का उठाव किया जाए। यदि मजबूरी है और राज्य शासन का भी आदेश है तो धान संग्रहण केंद्रों में कोरोनावायरस के नियमों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा ।वहां धान लोडिंग में लगे लोगों को मास्क पहनने और जरूरी सावधानी बरतने क्यों नहीं कहा जा रहा। पूरे संग्रहण केंद्र को सेनेटाइज क्यों नहीं किया जा रहा।