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April 5, 2025 4:47 am

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यही हाल रहा तो दशहरे के दिन भी शहर विधायक को रावण दहन का मुख्य अतिथि नही बनाया जाएगा , उपेक्षा की पराकाष्ठा कहाँ तक जाएगी ?

बिलासपुर । शहर के विधायक शैलेश पांडेय लगातार उपेक्षा के शिकार हो रहे है सत्ताधारी दल कांग्रेस का विधायक होने के बाद उनका यह हाल है और यदि दूसरे दल के होते तो पता नही उनका क्या हश्र होता । ताजा मामला अटल विश्वविद्यालय का है । यदि यही हाल रहा और तो दशहरे के दिन भी रावण दहन कार्यक्रम का मुख्य अतिथि विधायक के बदले कोई और होगा । शायद इसीलिए समर्थक हो रही उपेक्षा का प्रतिकार करने लामबंद हो गए है ।

सबसे पहली बात तो यह कि शैलेष पांडेय का विधायक बनना ही बहुत से लोगो को रास नही आ रहा है मगर क्या करे विधायक तो जनता ने उन्हें बनाया है । जिन्हें रास नही आया वे 5 साल तक विरोध के साथ ही षणयंत्र भी करते रहेंगे ऐसा करके वे भाजपा की अघोषित तौर पर मदद कर रहे है और भाजपा भी यही चाहती है ।

शहरविधायक का नाम अटल विवि प्रबंधन ने क्या जानबूझकर छोड़ा या किसी के दबाव के चलते यह जानने का अधिकार शहर विधायक को है यदि वे चाहेंगे तो मगर विवि में अभी भी भाजपा सरकार का बुखार नही छुटा है । सांसद , महापौर चूंकि भाजपा के है इसलिए उन्हें विवि के कार्यक्रम में मंच में जगह मिल रही है यह इस बात का द्योतक है कि विवि प्रबंधन ने शहर विधायक को भाजपा विरोधी मानकर ही उनकी उपेक्षा का तानाबाना बुना मगर प्रबंधन को यह क्यो नही मालूम कि राज्य में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और अब भाजपा की सरकार नही है ।

आश्चर्य तो यह है शहर विधायक की इस तरह से उपेक्षा पर कांग्रेस संगठन मौन रहता है इसका आशय क्या यही लगाया जाय कि उपेक्षा पर कांग्रेस संगठन की मौन सहमति है । यदि नही है तो संगठन के नेताओ को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ।

अगले माह विजयादशमी का पर्व है और पिछले 15 साल से शहर में एकतरफा एकाधिकार जमा चुके अमर अग्रवाल पिछले साल तक पूरे शहर में घूम घूम कर सारे दशहरा उत्सव में मुख्य अतिथि बनकर रावण दहन करते रहे है ।कांग्रेस के लोगो को एकात जगह ही मुख्य अतिथि बनने का मौका मिलता था । किसी भी दशहरा उत्सव समिति की हिम्मत नही होती थी कि वे अमर अग्रवाल को छोड़ किसी दूसरे को अतिथि बनाएं ।पुलिस लाइन के समारोह को लेकर तो दो बार अच्छा खासा विवाद भी हुआ । तत्कालीन महापौर रहे उमाशंकर जायसवाल और श्रीमती वाणी राव के कार्यकाल में अमर अग्रवाल ने अपने मंत्रिपद के दम पर दोनो महापौर को नीचा दिखाने में कोई कसर नही छोड़ा था । खैर सरकार भाजपा की थी तो सारा प्रशासन अमर अग्रवाल के सामने नतमस्तक था और 15 साल सारे अवसरों पर वही हुआ जो अमर अग्रवाल चाहते थे मगर अब तो न अमर अग्रवाल मंत्री रहे और न ही प्रदेश में भाजपा की सरकार है ऐसे में बिलासपुर में सत्ता परिवर्तन का जैसा असर दिखने चाहिए वैसा दिख नही रहा है और विधायक शैलेश पांडेय के साथ विपक्ष के विधायक जैसा व्यवहार हो रहा है यह बिलासपुर की जनता का अपमान है ।

20 साल से लगातार शहर को अपने कब्जे में रख अपने मनमाफिक काम करने वाले अमर अग्रवाल को हरा पाना कांग्रेसी नेताओं के वश की बात ही नही थी क्योंकि उनको अपने चुनावी प्रबंधन का बड़ा घमंड था मगर शहर की जनता मौके की ताक में थी और शैलेष पांडेय के रूप में नए चेहरे को अपने बीच पाकर 20 साल का कसर एक झटके में निकाल दिया और दो दशक के दम्भ को चकनाचूर कर दिया लेकिन शहर की जनता को क्या पता था कि उसके द्वारा निर्वाचित विधायक की इतनी उपेक्षा की जाएगी ।

अब जबकि शहर विधायक लगातार उपेक्षा का दंश झेल रहे है तो इस बात की क्या गारंटी है कि विजयादशमी पर्व के दिन रावण दहन कार्यक्रमो में शहर विधायक शैलेश पांडेय को ही मुख्य अतिथि बनाया जाएगा ? हो सकता है विरोध को देखते हुए रणनीतिकारों द्वारा विजयादशमी पर्व की छाया मुख्य अतिथि तखतपुर विधायक को बना दिया जाए । शायद इन्ही आशंकाओं के मद्दे नजर विधायक समर्थक युवा अभी से उपेक्षा को लेकर जोरदार प्रतिकार कर रहे है ।

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