

बिलासपुर । कल 1 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस है ।कल के ही दिन 13 साल पहले वरिष्ठ भाषा विद और साहित्यकार डॉक्टर पालेश्वर प्रसाद शर्मा को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर का एक ऐसा सम्मान मिला था जो आज तक बिलासपुर के किसी साहित्यकार को नहीं मिल पाया है ।भारत सरकार द्वारा वर्ष 2009 में डॉक्टर पालेश्वर प्रसाद शर्मा को वयोंश्रेष्ठ सम्मान(रचनात्मक कला) से नवाजा गया था। आकाशवाणी रायपुर के लब्ध प्रतिष्ठित उद्घोषक मिर्जा मसूद ने उनका 45 मिनट तक की अवधि वाला इंटरव्यू लिया था हम उस इंटरव्यू को इस खबर के साथ नीचे अलग से पोस्ट कर रहे है ।

स्वर्गीय डॉक्टर पालेश्वर प्रसाद शर्मा को दिए गए इस सम्मान में पत्र में कहा गया कि डॉक्टर पालेश्वर प्रसाद शर्मा शब्दों को समर्पित व्यक्ति है। कॉलेज में 32 वर्षों तक अध्यापन कर चुके डॉ शर्मा ने रचनात्मक साहित्य इतिहास और संस्कृति आदि विविध विषयों पर एक दर्जन से भी अधिक पुस्तकों की रचना की है।डा. शर्मा की 100 से भी अधिक रचनाओं का प्रसारण ऑल इंडिया रेडियो पर हो चुका है। उनके लेखों का प्रकाशन प्रतिष्ठित अखबारों तथा पत्र-पत्रिकाओं में भी हो चुका है। उनकी रचनाओं को बड़े पैमाने पर ख्याति मिली है और लंबे कार्यकाल में अनेक पुरस्कारों तथा सम्मान से अलंकृत किया जा चुका है। मध्य प्रदेश साहित्य सम्मेलन में उन्हें उनकी पुस्तक “छत्तीसगढ़ का इतिहास एवं परंपरा” के लिए बागेश्वरी सम्मान प्रदान किया गया है । छत्तीसगढ़ी हिंदी शब्दकोश के लिए बिहार सरकार ने इन्हें ” विद्याकर कवि सम्मान” से विभूषित किया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें पंडित सुंदरलाल शर्मा पुरस्कार से भी सम्मानित किया है । 82 साल की उम्र मैं भी सक्रिय तथा फुर्तीले डा. पालेश्वर रचनात्मक सरोकारों को आज भी अंजाम दे रहे हैं ।
अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर राष्ट्रीय स्तर का “वयोंश्रेष्ठ सम्मान “पहली बार बिलासपुर के किसी साहित्यकार को वर्ष 2009 में मिला था। उल्लेखनीय तथ्य तो यही है कि इस तरह का ऐसा सम्मान आज तक बिलासपुर के किसी अन्य साहित्यकार को नहीं मिल पाया है ।स्वर्गीय डॉ शर्मा ने यह पुरस्कार प्राप्त कर बिलासपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के साहित्यजगत को गौरवान्वित किया था।
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