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April 5, 2025 9:47 pm

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विधानसभा चुनाव के बहाने लोकसभा की 9 सीटों को बचाने की भी कवायद कर रही भाजपा वही कांग्रेस के सामने 75 पाना तो दूर 71 सीटो को बचाए रखने की चिंता

बिलासपुर।छत्तीसगढ़ में भाजपा की चाहे जैसी भी स्थिति हो मगर विधानसभा चुनाव में  बेहतर रिजल्ट लाने के लिए पार्टी के और संगठन के नेताओ को आखिर ऐसे क्या क्या करने पड़ेंगे ताकि लोकसभा चुनाव में पार्टी  की तमाम सीटे सुरक्षित रह सके,इस बात को लेकर नेताओ में लगातार माथापच्ची हो रही है ।दरअसल 2024में मोदी की सरकार फिर से बनाने के लिए पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व अभी से चुनावी मोड़ में आ चुका है।विधानसभा चुनाव तो भाजपा के लिए लिटमस टेस्ट जैसा है लेकिन कर्नाटक चुनाव के नतीजे ने भाजपा का पूरा खेल बिगाड़ दिया है और डर सता रहा है कि कर्नाटक चुनाव के नतीजे का असर पांच राज्यों सहित पूरे देश में न पड़े इसीलिए पार्टी ने मोदी सरकार के 9 साल पूरे होने के बहाने पूरे देश में केंद सरकार की योजनाओं का ऐसा प्रचार प्रसार करने का निर्णय लिया कि उससे कर्नाटक चुनाव के नतीजे की चमक फीकी पड़ जाए साथ ही 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में भी इसका लाभ भाजपा को मिल सके इसी वजह से विधानसभा चुनावों के 5 माह पहले ही भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने पार्टी के राष्ट्रीय नेताओ को तमाम राज्यों में भेजकर जनसभा से लेकर और भी कार्यक्रम की प्लानिंग की  है।भाजपा संगठन के नेताओ ,प्रभारियों को तो काम में लगाया जा चुका है वही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ,केंद्रीय गृह मंत्री समेत अन्य तमाम मंत्रियों को  ए सी से बाहर निकलने  का आदेश दे तपती गर्मी में जनसभा लेने भेजा जा रहा है।भाजपा में अभी टिकट की कोई चर्चा नहीं हो रही सिर्फ दौरे ,भाषण,और बैठकों पर सबको लगा दिया गया है इतना जरूर है कि दावेदारों को भ्रम में रखने 2 बार सर्वे कराया जा चुका है और एक सर्वे और कराया जायेगा।अभी कुछ नेताओ को छोड़ किसी को पता नहीं है किसकी टिकट पक्की है लेकिन भाजपा के बड़े नेता आपस में राय कुमारी जरूर कर रहे है।यहां यह बताना जरूर लाजिमी है कि केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद भाजपा संगठनात्मक रूप से काफी मजबूत हो गई है और चुनाव लड़ने तथा जीतने के सारे पैंतरे मजबूत कर लिए है। संघ के साथ ही पार्टी के सारे मोर्चो को एक्टिव किया जा चुका है एक एक घर तक पहुंचने पार्टी के लक्ष्य को अभी से पूरे करने की जिम्मेदारी बांट दी गई है ताकि लोकसभा चुनाव में ये सारी कवायद काम आ सके । इतना ही नहीं पार्टी से उपेक्षित होकर पार्टी कार्यक्रमों से वर्षो से दूर हो घर बैठ चुके कार्यकर्ताओं को भी सक्रिय करने पार्टी ने योजना बनाई है । 15 साल सरकार में रही पार्टी के मात्र 14 विधायक ही निर्वाचित होने से पार्टी को यह अहसास है की छत्तीसगढ़ में पार्टी की हालत कितनी दयनीय है फिर भी अबकी बार बहुमत जुटा लेने और राज्य में सरकार बनाने का दावा करने सभी नेताओ को निर्देश मिला हुआ है । आने वाले महीनों में भाजपा की चुनावी रणनीति दिखेगी ।भूपेश सरकार के खिलाफ आने वाले 5 माह तक भाजपा की सक्रियता और रणनीति से स्पष्ट हो जाएगा कि लोकसभा की तैयारी है।

इधर कांग्रेस में 5 माह पहले ही टिकट मिलने और टिकट कटने की चर्चा शुरू हो गई है।कांग्रेस ने  “अबकि बार 75 पार” के मिशन को कामयाब बनाने के लिए तैयारी शूरू कर दी है वही यह भी कयास लगाया जा रहा है कि कई विधायकों के टिकट कट सकते हैं। दरअसल ये कयास इसलिए शुरू हुए, क्योंकि बुधवार को बिलासपुर में छत्तीसगढ़ की कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा ने कहा था कि टिकट ऐसे ही किसी को नहीं मिल जाती है। पहले सर्वे होता है और फिर परफार्मेंस के आधार पर टिकट मिलता है। उन्होंने पार्टी के खिलाफ  काम करने वालो को  चेतावनी भी दे डाली है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी  कहा है कि प्रदेश प्रभारी की मंत्रियों के साथ बैठक हुई है, विधायकों के साथ भी उनकी बैठक हुई है। प्रदेश प्रभारी का काम ही है रिपोर्ट लेना। अधिकतर विधायकों की परफॉर्मेंस अच्छी है। अगर परफॉर्मेंस अच्छी होगी तो टिकट क्यों कटेगी? कुछ लोगों के स्वास्थ्यगत विषय हैं, नाराजगी भी हो सकती है। अभी भी चार माह समय है विधायक परफार्मेंस सुधार कर सकते हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कांग्रेस के परफॉर्मेस रिपोर्ट पर कहा कि सर्वे के टॉप 3 नामों पर हम विचार करते है, बाकी हमारे साथी उन्हें जीताने में लग जाए। बिलासपुर संभाग के 12 सीटें पिछले चुनाव में हम हारे थे। उन्हें कैसे जीते इस रणनीति के साथ हम आगे बढ़ रहे है। संगठन का मुखिया होने के नाते अपना परफॉर्मेस देना होता है। विधायकों को अपनी उपलब्धियों को बताना होता है और समय समय पर हम यह रिपोर्ट देते रहते है।

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