Explore

Search

April 5, 2025 8:39 am

Our Social Media:

बेलतरा विधान सभा क्षेत्र में क्या ब्राह्मण प्रत्याशियों के दिन लद गए जबकि दो चुनाव को छोड़ सारे चुनाव कांग्रेस प्रत्याशियों ने जीता है,कांग्रेस पिछड़ा वर्ग को मौका तो दे रही मगर घोषित किए जाने वाले प्रत्याशी का मूल्यांकन नहीं कर पाती

बिलासपुर। बेलतरा विधानसभा में क्या ब्राह्मण प्रत्याशियों के दिन लद गए हैं? यह प्रश्न इस लिए उठ रहा है क्योंकि सीपत और बेलतरा विधानसभा में अभी तक सिर्फ दो प्रत्याशी गैर ब्राह्मण चुनाव जीते हैं पहला सीपत विधानसभा क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी के इंजिनियर रामेश्वर खरे ने वर्ष 1998 में आश्चर्यजनक ढंग से चुनाव जीते और भाजपा, कांग्रेस के प्रत्याशियों को हराया था तब उस क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी का भारी दबदबा था। दूसरी बार पिछले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के रजनीश सिंह ने चुनाव जीता ।सीपत बाद में बेलतरा विधानसभा बनने के बाद चुनाव में ब्राह्मण प्रत्याशी ही जीतते आ रहे थे लेकिन प्रत्याशी चयन में गड़बड़ी होने पर क्षेत्र के मतदाता बर्दाश्त नहीं करते और बहुजन समाज पार्टी की ओर झुक जाते हैं। सीपत विधानसभा क्षेत्र में राधेश्याम शुक्ला, अरुण तिवारी ,चंद्रप्रकाश बाजपेई आदि ब्राह्मण प्रत्याशी ही चुनाव जीते लेकिन 1998 के चुनाव में मतदाताओं ने बसपा का साथ दिया तो वर्ष 2018 के चुनाव में मतदाताओं ने भाजपा के गैर ब्राह्मण प्रत्याशी रजनीश सिंह जीता दिया। पिछले कुछ चुनाव से बेलतरा विधानसभा में जातिगत वोट देने का ट्रेंड बदला है। इस लिहाज से कांग्रेस और भाजपा दोनों यदि पुराने ढर्रे पर लौटते हुए ब्राम्हण प्रत्याशियों का चयन करते हैं तो मतदाता फिर स्वविवेक से निर्णय लेते हुए कुछ भी चुनाव परिणाम दे सकते हैं भारतीय जनता पार्टी तो बजाए ब्राह्मण प्रत्याशी उतारने की जगह वर्तमान विधायक को ही टिकट देगी ऐसी संभावना है लेकिन कांग्रेसका कोई ठिकाना नहीं है। विधानसभा क्षेत्र में प्रत्याशी बनने के लिए ब्राह्मण और पिछड़ा वर्ग के दावेदारों के बीच घमासान मचा हुआ है यह भी उल्लेखनीय है कि पूर्व में कांग्रेस के ब्राह्मण प्रत्याशी ही चुनाव जीते रहे मगर पिछला 5 चुनाव कांग्रेस पिछड़ा वर्ग प्रत्याशी के कारण हार रही है इसका मतलब यह नहीं है कि पिछड़ा वर्ग के दावेदार कमजोर हैं ।दरअसल कांग्रेस पिछड़ा वर्ग से प्रत्याशी तो घोषित कर देती है लेकिन जीत सकने वाले प्रत्याशी का चयन क्यों नहीं किया जाता यह समझ से परे है ।अभी भी बेलतरा विधानसभा में पिछड़ा वर्ग के प्रत्याशियों के लिए दर्जनों दावेदार हैं इस विधानसभा क्षेत्र में साहू, कुर्मी, यादव मतदाताओं की बहुलता है और पिछड़ा वर्ग मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक है इसके बाद भी कांग्रेस का पिछड़ा वर्ग का प्रत्याशी चुनाव हार जाता है ।यह विचारणीय है। सारांश यही है कि कांग्रेस प्रत्याशी चयन करते समय जीत सकने वालेटी पिछड़ा वर्ग प्रत्याशी को टिकट नहीं देती बल्कि ऐसे व्यक्ति को प्रत्याशी बनाया जाता है जिसे मतदाता तो पसंद करते नहीं ऊपर से उसे अन्य दावेदारों का सहयोग नहीं मिल पाता। उधर पिछले चुनाव में भाजपा के रजनीश सिंह के चुनाव जीत जाने के बाद भी भाजपा में ब्राम्हण दावेदारों की संख्या में कमी नहीं आई है।भारतीय जनता पार्टी पहली बार वर्ष 2003 में अपना खाता खोला उसके बार वह लगातार चुनाव जीतती आ रही है हालांकि जीत का अंतर काफी कम रहता है।इस विधानसभा क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी का अच्छा खासा प्रभाव है ।सतनामी और सूर्यवंशी समाज के मतदाताओं का झुकाव बहुजन समाज पार्टी के प्रति शुरू से रहा है ।यह तय है कि कांग्रेस ,भाजपा प्रत्याशी चयन करने में थोड़ी भी गलती की तो बहुतायत मतदाता बसपा की तरफ जा सकते है। पिछले चुनाव में कांग्रेस छोड़कर जोगी कांग्रेस से चुनाव लडे अनिल टाह को 39 हजार वोट मिले थे यही वोट कांग्रेस प्रत्याशी के हार का कारण बना था ।अनिल टा ह अब कांग्रेस में है।इस बार बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं का मूड कैसा रहेगा यह चुनाव के दौरान पता लग सकेगा ।प्रश्न यह है कि मतदाता इस बार जीत का ताज ब्राम्हण,पिछड़ा वर्ग या ठाकुर अथवा अजा के उम्मीदवार के सिर पर पहनाएंगे? बसपा से अजा का प्रत्याशी होगा यह लगभग तय है । कांग्रेस पिछले 4 चुनावो में पिछड़ा वर्ग का प्रत्याशी घोषित कर लगातार चुनाव हार चुकी है ।कांग्रेस की यही एक बड़ी समस्या है कि पिछड़ा वर्ग प्रत्याशी का चयन तो करती है लेकिन टिकट चयन के पूर्व जीत सकने लायक चेहरे का चयन नही करती ।जिसे प्रत्याशी घोषित करती है उसका मूल्यांकन नहीं करती ।कांग्रेस में कुछ भी हो सकता है ।यह भी संभव है कि कांग्रेस प्रत्याशी चयन के मामले में वर्ष 2003 के पुराने ढर्रे पर आ जाए और ब्राम्हण प्रत्याशी घोषित कर दे या फिर पिछड़ा वर्ग से ही किसी जीत सकने वाले चेहरे को मौका दे दे ।बेलतरा विधानसभा वर्ष 2008 में अस्तित्व में आया इसके पहले वह सीपत में था।इसके पहले सीपत बलौदा विधानसभा में शामिल था ।यह भी उल्लेखनीय है कि सन 1961 से लेकर बलौदा फिर सीपत उसके बाद बेलतरा विधानसभा में वर्ष 2003 के पहले जितने भी विधानसभा चुनाव हुए भाजपा ने एक दो ब्राम्हण चेहरे को अपना प्रत्याशी बनाया और लगातार चुनाव में उसे हार मिली लेकिन वर्ष 2003 में जैसे ही भाजपा ने ब्राम्हण प्रत्याशी के रूप में बद्रीधर दीवान को घोषित किया ,भाजपा की लाटरी लग गई और तीन चुनावो में भाजपा ही जीती लेकिन बद्रीधर दीवान के निधन के बाद वर्ष 2018 के चुनाव में भाजपा ने गैर ब्राह्मण रजनीश सिंह को मौका दे दिया तब भी भाजपा की ही जीत हुई ।कांग्रेस अभी तक भाजपा की गणित और प्रत्याशी चयन के फार्मूले को नहीं समझ पाई है।
पिछले चुनावो पर नजर डालें तो वर्ष 1957 के बाद के हुए चुनावो में जनसंघ से राधेलाल तिवारी दो बार चुनाव लडे थे और दोनो बार उनकी हार हुई ।उन्हे कांग्रेस के रामेश्वर शर्मा ने हराया था और वे एमपी मंत्रिमंडल में सिंचाई मंत्री भी बने थे।जनसंघ से टिकट नहीं मिलने पर पंडित रमाकांत मिश्र 3 बार हाथी चुनाव चिन्ह पर चुनाव लडे थे ।मुकाबला ब्राम्हण उम्मीदवारों के बीच ही होता आयाहै ।वर्ष 1980 के चुनाव में भाजपा ने पंडित रामनारायण शास्त्री को लड़ाया था लेकिन वे भी चुनाव हार गए थे।वर्ष 1984 के चुनाव में भाजपा ने ठाकुर प्रेम सिंह को प्रत्याशी घोषित किया तो वे भी कांग्रेस उम्मीदवार अरुण तिवारी से चुनाव हार गए।उसके बाद हुए चुनाव में कांग्रेस ने अरुण तिवारी की टिकट काट कर सेवादल के चंद्र प्रकाश बाजपेई को प्रत्याशी घोषित किया ।श्री बाजपेई भी चुनाव जीत गए।।वर्ष 1998 के चुनाव में सीपत क्षेत्र के मतदाताओं ने बदलाव लाने का निर्णय लिया और बहुजन समाज पार्टी के रामेश्वर खरे को जीता दिया।रामेश्वर खरे ने चंद्र प्रकाश बाजपेई को हराया था।तब पूरे जिले में बहुजन समाज पार्टी का जलवा दिखता था ।उसके बाद शायद बसपा का जलवा जलाल ढलान पर आने लगा ।वर्ष 2003 में भाजपा ने बेलतरा चुनाव जीता उसके बाद आज तक उसका कब्जा बरकरार है।
इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव में राजनैतिक परिस्थियां काफी बदल गई है। बसपा फिर से जनाधार बढ़ाने के प्रयास में लग गई है तो आम आदमी पार्टी की भी एंट्री हो चुकी है कुल मिलाकर वोटो का ध्रुवीकरण होगा। एक बात और है पिछले चुनाव में 39 हजार वोट हासिल कर कांग्रेस की जीत में रोड़ा बने अनिल टाह इस बार चुनाव मैदान में नहीं होंगे ।वही 39 हजार वोट में जो प्रत्याशी जितना ज्यादा वोट झटक लेने में कामयाब होगा उसी की जीत सुनिश्चित है। एक बात और है बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के कुल मतदाताओं में से लगभग आधा मतदाता बिलासपुर शहरी क्षेत्र के मंगला से लेकर,सरकंडा,राजकिशोर नगर , मोपका में रहते है। इन क्षेत्रों के मतदाताओं को अगर कोई प्रत्याशी साध लेता है तो उसकी जीत लगभग तय है।
अब बात करें दावेदारों की तो पिछले कई चुनावों से दावेदार रहे लोगों में से अधिकांश लोग इस बार भी दावेदारी कर रहे हैं भारतीय जनता पार्टी के बनिस्बत कांग्रेसमें दावेदारों की संख्या शुरू से ही याद आ रही है क्योंकि इस बार प्रदेश में अंग्रेज की सरकार है इसलिए कांग्रेस दावेदारों की संख्या में बढ़ोतरी पुणे होना सामान्य बात है भारतीय जनता पार्टी में वर्तमान विधायक रजनीश सिंह के अलावा सुशांत शुक्ला ,पार्षद राजेश सिंह,उमेश गौरहा, द्वारिकेश पांडेय आदि के नाम दावेदारों में शामिल है।
कांग्रेस दावेदारों की बात करें तो चुनाव हार चुके पराजित प्रत्याशी अभी भी टिकट पाने की चाहत पाल रहे हैं वही जिला पंचायत सभापति अंकित दौरा कांग्रेस पिछड़ा वर्ग के नेता त्रिलोक श्रीवास, इंजीनियर एल के गहवई,जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केसरवानी,महापौर रामशरण यादव ,पर्यटन मंडल के अध्यक्ष अटल श्रीवास्तव समेत कई दावेदार थे लेकिन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा अपने सलाहकार प्रदीप शर्मा को ज्यादा अहमियत दिए जाने से कई बड़े दावेदारों ने अपनी दावेदारी अघोषित तौर पर वापस ले ली है ।

Next Post

श्री श्री जगन्नाथ मंदिर से निकली रथयात्रा , रथ का रस्सा खींचने उमड़े महाप्रभु के भक्त ,नगर विधायक शैलेष पांडेय ने निर्वहन किया छेरा पहरा की परंपरा - - लगाया झाडू

Tue Jun 20 , 2023
*नगर विधायक शैलेष पांडेय ने श्री श्री जगन्नाथ पूजा समिति उत्कल समाज को 1 माह का वेतन देने की घोषणा की* बिलासपुर। रेलवे परिक्षेत्र स्थित श्री श्री जगन्नाथ मंदिर में रथ यात्रा अपनी प्राचीन परंपरा के अनुरूप पिछले कई दशकों से रथ यात्रा निकल रही है। यहां उड़ीसा स्थित श्री […]

You May Like