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April 5, 2025 2:46 am

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अमर ने टिकट नही दी तो वरिष्ठ पार्षद व्ही रामाराव ने भाजपा छोड़ी ,काँग्रेस में शामिल हुए , और भी नाराज भाजपाई करेंगे किनारा ,निर्दलीय लड़ेंगे चुनाव या पार्टी में रहकर हराएंगे

बिलासपुर। पूर्व मंत्री और भाजपा के नगरीय निकाय चुनाव प्रभारी अमर अग्रवाल की बात मानते हुए रेलवे क्षेत्र के भाजपा नेता और 4 बार के पार्षद व्ही रामाराव ने भाजपा छोड़ दी है और राजधानी जाकर काँग्रेस में शामिल हो गए । अब वे काँग्रेस की टिकट पर रेलवे क्षेत्र से पार्षद का चुनाव लड़ेंगे । भाजपा ने रामाराव की टिकट काट दी जिससे भाजपा को रामाराव ने तगड़ा झटका दे दिया है ।

रेलवे क्षेत्र में कभी पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल के सारथी रहे व्ही रामाराव की बदौलत भाजपा को लोकसभा और विधानसभा चुनाव अच्छी खासी बढ़त मिलने लगी थी । भाजपा का जनाधार भी तेजी से बढ़ा मगर दो साल पहले अमर अग्रवाल और रामाराव के सम्बन्धों में खटास आना शुरू हो गया था । रामाराव वरिष्ठ पार्षद होने की वजह से नगर निगम में एमआईसी मेम्बर थे मगर उनकी पूछपरख कम हो गई क्योकि उन्होंने अमर अग्रवाल का साथ छोड़कर नेता प्रतिपक्ष धरम लाल कौशिक और तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह का दामन थाम लिया था यह बात अमर अग्रवाल और उनके समर्थकों को नागवार गुजर रहा था सप्ताह भर पहले रामाराव अमर अग्रवाल को अपना नेता बताते हुए पार्षद चुनाव की दावेदारी करने अमर अग्रवाल के निवास पहुंचे तो अमर अग्रवाल ने उन्हें निर्दलीय अथवा काँग्रेस की टिक ट पर चुनाव लड़ने की सलाह देते हुए काँग्रेस नेताओं से ज्यादा मेलजोल रखने का आरोप लगाया और जब प्रत्याशी चयन की बात आई तो रामाराव की टिकट सबसे पहले काटा गया ।
रामाराव को समझ मे आ गया कि अमर अग्रवाल के रहते उसे भाजपा में कहीं जगह नही मिलेगी उसने तत्काल फैसला लिया और तुरन्त रायपुर रवाना हो वहां बिलासपुर विधायक से बात कर उनके साथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल प्रभारी पीएल पुनिया व प्रदेश काँग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम से मिलकर आनन फानन में काँग्रेस शामिल हो गए हालांकि इस खबर को शाम तक छिपाया जाता रहा ।रामाराव ने

काँग्रेस में शामिल हो जाने का निर्णय लिया ताकि काँग्रेस बिलासपुर में प्रत्याशियों की घोषणा करें तो उसे मौका मिल जाये । रामाराव के काँग्रेस प्रवेश में शहर विधायक शैलेश पांडेय की बड़ी भूमिका है । श्री पांडेय ने रामाराव को काँग्रेस में शामिल कराकर भाजपा को बड़ा झटका दिया है साथ ही रेलवे क्षेत्र में भाजपा के किले में बड़ी सेंध लगाने की रणनीति पर सफलता पाई है ।

राजनीतिक गलियारे में पिछले कुछ दिनों से जो दो कयास लगाए जा रहे थे वह एक के बाद एक सही साबित हुए है। पिछले दो-तीन सालों में रेलवे क्षेत्र के पार्षद रामाराव और पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल के बिगड़ते संबंधों से इतना साफ होने लगा था कि रामाराव के लिए संकट बढ़ सकता है। अपनी ही पार्टी के नेता के प्रति रामाराव के बगावती तेवर के पीछे जो भी कारण रहे हो, पर इस कारण से उनकी नजदीकी वर्तमान नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह से बढ़ती चली गई । और यही बात शायद अमर अग्रवाल को पसंद नहीं आई । रही सही कसर विधानसभा चुनाव ने पूरी कर दी थी। जब बीमारी का बहाना कर रामाराव ने अमर अग्रवाल के लिए प्रचार तो किया ही नहीं, उल्टे उनके कार्यकर्ताओं ने खुलकर कांग्रेस प्रत्याशी का प्रचार किया। इसका भी साइड इफेक्ट यह निकला कि कभी रामाराव के राइट हैंड रहे साईं भास्कर ने बगावत करते हुए रामाराव के खिलाफ ही चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया और कांग्रेस के पैनल में वार्ड क्रमांक 69 से उनका नाम भी शामिल कर लिया गया। इसी दौरान लगातार प्रयासों के बाद भी रामाराव और अमर अग्रवाल के रिश्तो में जमी बर्फ नहीं पिघली और रामाराव का टिकट कट गया।

इससे एक बात और जाहिर हुई कि बिलासपुर की राजनीति में केवल और केवल अमर अग्रवाल की ही चलती है। इस मामले में पार्टी के बड़े नेताओं की भी एक नहीं चली। इससे रामाराव को भी समझ में आ गया कि अब कहीं और से सिफारिश कराने का कोई लाभ नहीं होगा। लंबे अरसे से यही कयास लगाया जा रहा था कि अगर रेलवे क्षेत्र से रामाराव को टिकट नहीं मिला तो वे कांग्रेस का भी दामन थाम सकते हैं और ऐसा ही हुआ भी। विधायक शैलेश पांडे के साथ उनकी बढ़ती नजदीकियों के चलते भी यह दावा किया जा रहा था और माना जा रहा है कि रामाराव के कांग्रेस प्रवेश के पीछे भी शैलेश पांडे की ही मुख्य भूमिका है।सूत्रों के अनुसार कांग्रेस, रामाराव को वार्ड क्रमांक 69 बिलासा बाई केंवटिन वार्ड से टिकट देगी और उनसे यह भी वादा किया गया है कि अगर वे जीतते हैं और कांग्रेस की शहर सरकार बनती है तो उन्हें महत्वपूर्ण पद भी दिया जाएगा । हो सकता है वरिष्ठ पार्षद के होने के नाते उन्हें सभापति बना दिया जाए वैसे भी भाजपा ने उन्हें सभापति बनाने में कोताही की । लगातार चार बार भाजपा के लिए जीत की वजह बनने वाले रामाराव भाजपा के व्यवहार से दुखी हो कांग्रेस में चले गए , क्योंकि उनके पास अब कोई विकल्प भी बचा नहीं था । निर्दलीय चुनाव लड़ने से कहीं बेहतर उन्होंने कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ने को माना।
रामाराव इस बात पर भी नाराज है कि रेलवे क्षेत्र के एकमात्र सामान्य सीट पर भाजपा ने पिछड़ा वर्ग का प्रत्याशी घोषित कर दिया । उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र के मतदाता भारतीय जनता पार्टी को इसका जवाब जरूर देंगे।
वही रामाराव ने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नगरीय निकाय चुनाव प्रभारी व पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने टिकट के फैसले में निजी राग, द्वेष को शामिल कर यह साबित कर दिया कि पार्टी हित उनके लिए कोई मायने नहीं रखती। उनका अहंकार उनके लिए सर्वोपरि है। वे पार्टी में सिर्फ अपनी ही चलाते हैं और भारतीय जनता पार्टी में अमर अग्रवाल किसी भी नेता को मुकाबले में उभरने देना नहीं चाहते। यही कारण है कि उनके साथ अन्याय किया गया है। इस साजिश के चलते रामाराव ने भारतीय जनता पार्टी को नुकसान होने और खुद को सहानुभूति मिलने का दावा करते हुए यह कहा कि कांग्रेस पार्टी के साथ वे नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं और उनका मानना है कि इस बार कांग्रेस को नगर निगम चुनाव में भारी सफलता मिलेगी। जिस तरह विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी हारी है ठीक उसी तरह अमर अग्रवाल के अहंकारी कार्यशैली और हठधर्मिता की वजह से नगर निगम का चुनाव भी भारतीय जनता पार्टी उनके नेतृत्व में हारने जा रही है ।

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