बिलासपुर। जिले के जिले के सबसे चर्चित और हाई प्रोफाइल विधानसभा सीट बेलतरा में प्रत्याशियों द्वारा नाम वापसी के बाद कांग्रेस भाजपा बसपा और आम आदमी पार्टी समेत 22 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है ।इस तरह 16 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।
इससे स्पष्ट है कि बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में निर्दलीय प्रत्याशी के चुनाव मैदान में रहने से पूरे समीकरण बिगड़ेंगे जिससे कांग्रेस ,बीजेपी बसपा और आम आदमी पार्टी के वोटो में सेंध लगना निश्चित है क्योंकि बेलतरा विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति तथा पिछड़ा वर्ग बाहुल्य क्षेत्र है तथा साहू, कुर्मी ,यादव मतदाताओं की संख्या बहुतायत मात्रा में है और इसी को मद्दे नजर रखते हुए 16 , निर्दलीय प्रत्याशियों में से ज्यादातर प्रत्याशी पिछड़ा वर्ग से चुनाव लड़ रहे हैं ।उन्हें उम्मीद है कि पिछड़ा वर्ग के वोट उन्हीं लोगों को मिलेंगे यानी कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी को मिलने वाली वोटो में कटौती संभावित है। इस तरह 16 निर्दलिय प्रत्याशी हार जीत को प्रभावित कर सकते हैं। निर्दलीय प्रत्याशियों में ग्राम नेवसा निवासी खोरबहरा राम साहू, डॉक्टर गौतम साहू विकास कुमार धीवर ,प्रहलाद यादव तथा ग्राम कड़री निवासी अश्वनी कुमार दुबे प्रमुख है ।इन पांचो प्रत्याशियों का विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं के बीच अच्छी पकड़ है। पिछड़ा वर्ग के साथ कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी द्वारा वादा खिलाफी करने एवं उपेक्षा किए जाने के खिलाफ ओबीसी प्रत्याशियों ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया है और 16 निर्दलीय उम्मीदवारों की नामांकन फॉर्म सही पाए गए हैं ।इसके बाद चुनाव मैदान में उतरकर जनसंपर्क ही शुरू कर दिए हैं । उल्लेखनीय है कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों ही दलों ने नए चेहरों पर दांव लगाया है ।कांग्रेस में जहां जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष विजय केशरवानी को तो भारतीय जनता पार्टी ने सुशांत शुक्ला को उम्मीदवार घोषित किया है । बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के मतदाता इन दोनों प्रत्याशियों को बखूबी जानती है ऐसा नहीं है। दोनों ही चेहरे नए हैं दोनों को प्रमुख दलों ने अपना प्रत्याशी बनाया है इसलिए बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच टक्कर तो है लेकिन बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी भी बड़ी संख्या में वोटरों को प्रभावित कर सकते हैं लेकिन 16 निर्दलीय प्रत्याशियों और बसपा तथा आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी को सब मिलकर 50000 से ऊपर वोट मिल सकते हैं जो कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी की वोट माने जाते हैं इस तरह निर्दलीय प्रत्याशी ही ज्यादा खेल कर सकते हैं नाम वापसी के दिन कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी की ओर से निर्दलीय खड़े प्रत्याशियों को नाम वापस लेने के लिए प्रेरित करने कोई रुचि नहीं दिखाई गई जिसका खामियाजा दोनों ही दलों को भुगतना पड़ सकता है।