Explore

Search

April 4, 2025 6:57 pm

Our Social Media:

काँग्रेस में निगम चुनाव जीतने के बाद भी गुटीय विवाद ,चुनाव हारे नरेंद्र बोलर ने विधायक पर लगाये गम्भीर आरोप तो विधायक ने भी सबूत बताने की दे दी चुनौती

बिलासपुर । नगर निगम में दो दशक बाद सत्ता में वापसी के पश्चात भी कांग्रेस का गुटीय विवाद शांत नही हो रहा है । पार्षद शैलेंद जायसवाल का टिकट कटवा खुद चुनाव लड़कर हार जाने वाले शहर कांग्रेस अध्यक्ष नरेंद बोलर ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपने हार का ठीकरा शहर विधायक शैलेष पांडेय के ऊपर फोड़ दिया तो भितरघात के आरोप से दुखी विधायक पांडेय ने इसका सबूत मांगा है और निराधार आरोप लगाने वाले नरेंद्र बोलर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग संगठन से कर दिया है ।

कांग्रेस नेताओं में गुटीय विवाद की शुरआत विधानसभा चुनाव के पहले तब शुरू हो गया था जब पार्टी ने कांग्रेस भवन में पुलिस की मार खाने वाले प्रदेश कांग्रेस कमेटी केमहा मन्त्री और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खास सिपहसलार अटल श्रीवास्तव को बिलासपुर विधानसभा से टिकट नही दिया और नया चेहरा शैलेष पांडेय पर पार्टी ने विश्वास किया और बिलासपुर से प्रत्याशी घोषित कर दिया । पार्टी के इस निर्णय का अटल समर्थकों ने भारी विरोध भी किया यही नही कांग्रेस भवन में प्रत्याशी शैलेष पांडेय को गन्दी गन्दी गालियां भी दी गई मगर शैलेष पांडेय ने सबकुछ सहन करते हुए पार्टी द्वारा किये गए विश्वास पर खरा उतरने की कोशिश जारी रखते हुए शहर की जनता का विश्वास प्राप्त करने में लग गए । उनके सामने कद्दावर मंत्री और 4 बार के विधायक अमर अग्रवाल को हराने की चुनौती थी ।

कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में श्री पांडेय पार्टी के विश्वास में एकदम खरे उतरे । उन्हें पार्टी के लोगो ने कम शहर की जनता ने जिताया क्योकि पिछले 20 साल के कार्यकाल से अमर अग्रवाल के व्यवहार से शहर की जनता के साथ ही भाजपा के कार्यकर्ता भी अब चुके थे और वे बदलाव चाहते थे उन्हें शैलेष पांडेय के रूप में एक अच्छा प्रत्याशी मिला और मतदाताओं ने अमर अग्रवाल के 20 साल के प्रभुत्व को खंडहर में तब्दील कर दिया ।

विधायक बनते ही शैलेष पांडेय शहर की जनता के चहेते तो बन गए मगर कांग्रेस संगठन के पदाधिकारियों की आंख की किरकिरी बन गए । उन्हें हर मंच पर अपमान करना शुरू कर दिया गया । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रथम बिलासपुर आगमन पर मंच में ही शहर कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा विधायक का हाथ खींच कर पीछे करने की मुद्रा वाली फोटो काफी वायरल हुई । उसके बाद कांग्रेस भवन में मंत्री के सामने ही रखी हुई कुर्सी विधायक के आने पर हटा देने की घटना भी हुई ।

नगर निगम चुनाव में पार्षद प्रत्याशी बनवाने और नाम कटवा देने का खेल भी काफी हुआ । निगम कांग्रेस पार्षदो की बहुमत के बाद सर्वाधिक पार्षद अपने पक्ष में बताने कई तरह की कोशिशें हुई । महापौर प्रत्याशी चयन में भी दोनो गुट ने जी जान लगा दी । एक दूसरे को मात देने तमाम शतरंजी चालें चली गई । चुनाव निपट जाने के बाद अमुम न गुटीय विवाद भी समाप्त हो जाने चाहिए मगर पराजित पार्षद नरेंद्र बोलर के आरोप से विवाद नए सिरे से सुलगने लगा है ।

कल नवनिर्वाचित महापौर और सभापति मुख्यमंत्री से सौजन्य भेंट करने राजधानी गए थे उनके साथ संगठन के अनेक पदाधिकारी भी थे । मुख्यमंत्री के समक्ष पराजित काँग्रेस प्रत्याशी नरेंद बोलर ने अपनी हार के लिए विधायक शैलेष पांडे को जिम्मेदार बताते हुए भितरघाती होने का भी आरोप लगा दिया । यह बात तेजी से फैल गई । नरेंद्र बोलर के आरोप पर विधायक शैलेष पांडेय ने कहा कि

मैं कांग्रेस का सच्चा सिपाही हूँ नगरीय निकाय चुनाव में मैंने अपने पार्षदों को जिताने के लिए मेहनत की है ना की हराने के लिए । जिस कांग्रेस ने मुझे बनाया उसे मैं कैसे हरा सकता हूं मेरे ऊपर लगाए गए आरोप निराधार हैं जिसकी जानकारी मुझे समाचार के माध्यम से मिली है। लेकिन मैं स्पष्ट करना चाहता हूं की नगरीय निकाय चुनाव में मैंने भरपूर मेहनत की है जी जान से काम किया है और पार्षदों को जिताने के लिए अपना पूरा पूरा समय दिया है अगर इसके बाद भी ऐसे आरोप लगते हैं तो मैं संगठन में इसकी शिकायत करूंगा और कड़ी कार्रवाई की मांग करूंगा । मैं कांग्रेस से विधायक बना हूं और इस पद की गरिमा जानता हूं ऐसा कोई काम नहीं करूंगा जिससे कांग्रेस पार्टी की छवि या मेरी छवि या मेरे भाइयों की छवि खराब हो। फिलहाल मामले की जानकारी ले रहा हूं समय आने पर संगठन के सामने अपनी बात रखूंगा।

दरअसल विधायक शैलेष पांडेय के समर्थंक पार्षद शैलेन्द्र जायसवाल की टिकट कटवाने विरोधी खेमे ने पूरा जोर लगा दिया था और उसी वार्ड से नरेंद्र बोलर ने अपनी दावेदारी कर टिकट की मांग की । पार्टी से यह खेमा शैलेंद जायसवाल का न केवल टिकट कटवाने में सफल रहा बल्कि नरेंद्र बोलर को पार्षद प्रत्याशी घोषित करवाने में भी कामयाब रहे । यही नही ज्यादा विरोध होने पर शैलेन्द्र जायसवाल को बगल के वार्ड से चुनाव लड़ने मजबूर होना पड़ा । नतीजन दोनो वार्ड से कांग्रेस हार गई । शैलेन्द्र जायसवाल तो मात्र 20 वोटो के अंतर से हारे । उसको हराने के लिए निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में खड़ा किया था । नरेन्द्र बोलर क्यो हारे यह जांच का विषय हो सकता है मगर उन्होंने विधायक पर जो आरोप लगाए है वह गम्भीर है मगर मुख्यमंत्री के समक्ष कहे गए नरेंद्र बोलर के कथन को सार्वजनिक करना और भी ज्यादा गम्भीर है ।आने वाले दिनों में शहर विधायक और संगठन के बीच विवाद गहरा सकता है हालांकि प्रदेश संग़ठन ने पार्षद चुनाव लड़ने वाले शहर और ग्रामीण जिला अध्यक्ष दोनो को संगठन की जिम्मेदारी से मुक्त कर कार्यवाहक अध्यक्षों की नियुकित कर दी थी लेकिन अभी यह स्पष्ट नही है कि निगम चुनाव के बाद दोनों कार्यवाहक अध्यक्षो की क्या स्थिति रहेगी और पूर्ण कालिक अध्यक्षो की भूमिका निगम चुनाव के बाद कैसी रहेगी ?

Next Post

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष के अमित पांडेय बने विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी

Tue Jan 7 , 2020
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संयुक्त महामंत्री पद पर कांग्रेस पार्टी के लिए निष्ठापूर्वक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे युवा नेता अमित पाण्डेय को छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने अपना ओएसडी नियुक्त किया है। राजधानी रायपुर के युवा नेता अमित पाण्डेय को भारत सरकार के पूर्व केन्द्रीय कृषि […]

You May Like