रायपुर शहर के इंदिरा बैंक घोटाले की जाँच में फिर आएगी तेज़ी ….कन्हैया अग्रवाल संयोजक
इंदिरा बैंक संघर्ष समिति ने दिया पुलिस अधीक्षक रायपुर को 15 मई को सौंपा ज्ञापन
वर्ष 2006 में हुआ था इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक घोटाला
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर शहर के इंदिरा प्रियदर्शनी महिला नागरिक सहकारी बैंक घोटाले की लगभग बंद पड़ी जाँच को पुनःप्रारंभ करवाने और तत्कालीन बैंक मैनेजर के नार्को टेस्ट की CD को न्यायालय में पेश करवाने की माँग को लेकर इंदिरा बैंक संघर्ष समिति के द्वारा गृह मंत्री ,पुलिस महानिदेशक एवं रायपुर जिला पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा है।
इंदिरा बैंक संघर्ष समिति के संयोजक कन्हैया अग्रवाल रायपुर ,सुरेश बाफ़ना ,पुरुषोत्तम शर्मा ,शैलेश श्रीवास्तव एवं शंकर सोनकर ने उकताशय का बयान जारी करते हुए कहा कि सन 2006 में इंदिरा प्रियदर्शिनी बैंक आर्थिक अनियमितता के चलते बंद हुई थी,उसके पश्चात बैंक घोटाले के गुनहगारों को सजा दिलवाने की बजाय बैंक को ही दिवालिया घोषित करने का कुचक्र रचा गया और बैंक के खातेदारों का आधा पैसा अंततः डूब गया
बैंक घोटाले के गुनाहगारों को सजा दिलाने और खातेदारों के भुगतान की माँग को लेकर खातेदारों ने रायपुर बंद ,धरना ,प्रदर्शन ,ज्ञापन ,घेराव करने के साथ न्यायालय की शरण भी ली थी ….लाठी खाई -जेल गए पर आंदोलन लगातार चलता रहा ,जिसका परिणाम कुछ आरोपियों की गिरफ़्तारी और घोटाले के प्रमुख अभियुक्त बैंक मैनेजर उमेश सिन्हा के नार्को एवं ब्रेन में मेपिंग टेस्ट के रूप में सामने आया,
संघर्ष समिति ने कहा कि नार्को टेस्ट होने के बाद बैंक घोटाले की जाँच ठंडी पर दी गई ..नार्को टेस्ट की CD जारी हुई तो स्पष्ट हुआ की जाँच क्यों बंद हो गई थी
इंदिरा बैंक संघर्ष समिति ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से भेंट कर नार्को टेस्ट की CD न्यायालय में पेश करने के साथ ही नार्को की रिपोर्ट और दर्ज मामले के अनुरूप घोटाला करने वालों के ख़िलाफ़ जाँच कार्रवाई तेज गति से प्रारंभ करवाने ज्ञापन दिया,पुलिस अधीक्षक ने मामले की गंभीरता को समझते हुए इस पर तत्काल कार्रवाई हेतू आश्वस्त किया, उल्लेखित हो कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के इस बैंक घोटाले को लेकर कांग्रेस के युवा नेता कन्हैया अग्रवाल के नेतृत्व में तत्कालीन समय से लेकर आज पर्यंत तक निरंतर बैंक के ग्राहकों के हित में शासन से संघर्ष किया जा रहा है, तथा निरंतर कन्हैया अग्रवाल द्वारा इस बैंक घोटाले के आरोपी लोगों पर कार्रवाई की मांग भी की जा रही है एवं पुनः पुलिस अधीक्षक रायपुर को सौपे गए ज्ञापन से इस घोटाले की परतें खुलने की संभावनाएं नजर आ रही हैं तथा तत्कालीन वर्ष 2006 में हुए इस घोटाले से हजारों ऐसे परिवारों एवं खाताधारकों को नुकसान उठाना पड़ा था ।