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April 5, 2025 4:05 am

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अपनों पर अतिरेक भरोसा करने वाले दिवंगत ललित सुरजन जी पंचतत्व में विलीन ,उनकी कमी और मार्गदर्शन हमेशा खलती रहेगी

बिलासपुर ।वरिष्ठ पत्रकार ,साहित्यकार और देशबन्धु समूह के प्रधान संपादक ललित सुरजन का राजधानी में आज पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया ।अब वे हमारे बीच नहीं रहे । यह शाश्वत सत्य है । कबीर साहेब कह गए है “आया है सो जायेगा ,राजा, रंक फकीर “सो ललित जी चले गए मगर बहुत सारी यादें और संस्मरण छोड़ गए । मै आज भले ही देशबन्धु में नहीं हूं मगर 23 बरस देशबन्धु में काम करके मैंने जाना देशबन्धु में जितनी स्वतंत्रता लिखने पढ़ने और पत्रकारिता करने की है वह आज भी किसी अन्य अखबार में नहीं है ।

मुझे देशबन्धु बिलासपुर में तीन संपादकों नथ मल शर्मा ,आलोक प्रकाश पुतुल और अशोक शर्मा के साथ सम्पादकीय में कार्य करने का अवसर मिला और मैं गर्व के साथ कहूंगा कि वह स्वतंत्रता पहले भी थीं और संभवतः आज भी कायम है । देशबन्धु में काम करने वाले अनेक पत्रकार आज बड़े अखबारों में अच्छे वेतन पर काम कर रहे है मगर वहां वह सुकून और स्वतंत्रता नहीं है जो उन्हें देशबन्धु में मिलता था । देशबन्धु एक अखबार नहीं बल्कि जुनून है । बीते एक डेढ़ दशक में व्यवसायिक पत्रकारिता करने वाले अनेक अखबारों के आ जाने के कारण देशबन्धु उनके बीच ठहर पाने या प्रतिस्पर्धी के रूप में नहीं रह पाया और एक वक्त ऐसा भी आया कि ललित सुरजन जी बिलासपुर आने के बाद भी देशबन्धु प्रेस में आना बन्द कर दिया ।

इसका क्या कारण था यह तो पता नहीं मगर एक बार जब वे बिलासपुर आए और प्रेस में नहीं आए तो मुझसे रहा नहीं गया ।उनका बिलासपुर में 2 दिन रुकने का प्लान था । मैंने पता किया कि ललित जी अभी बिलासपुर में कहां मिल सकते है तो मालूम पड़ा कि वे अज्ञेय नगर में अपने परिचित मंजू मित्रा के यहां है मैंने देशबन्धु में ही प्रबंधन में काम करने वाले सहयोगी भागवत वर्मा को साथ लेकर मंजू मित्रा के यहां पहुंच गया । उस दौरान देशबन्धु में काम करने वाले सिर्फ 3 लोगो संपादक अशोक शर्मा ,प्रदीप आर्य और मुझे ललित जी व्यक्तिगत रूप से जानते थे । उन्होंने मंजू मित्रा के यहां मुझे देखते ही बोले आओ निर्मल ,कैसे आना हुआ ,सब ठीक तो चल रहा है न ? औपचारिक बातें होने के बाद मैंने उनसे झिझकते हुए कहा कि आप बिलासपुर आते है और प्रेस में नहीं आते इससे अच्छा सन्देश नहीं जाता ,कर्मचारी आपसे वेतन की मांग नहीं करेंगे लेकिन आप अगर प्रेस आएं तो सभी कर्मचारी उत्साहित होंगे और आपका मार्गदर्शन भी मिल सकेगा । मेरी बातो को उन्होंने पूरी तरह तो सुना मगर उन्होंने जो बातें कही उससे सीना चौड़ा हो गया और खुशी भी हुई मगर मैं अपनी बात पर अड़ा रहा ।

उन्होंने कहा प्रेस में मेरा क्या काम ? आप सब लोग हो ,अच्छी तरह पूरी जिम्मेदारी से संभाल रहे हो इतना काफी नहीं है क्या ?मुझे आप लोगो पर भरोसा है आप लोग कोई गलती नहीं करोगे । मन में मै सोचा क्या सचमुच में इतना भरोसा करते हैं हम लोगो पर ? फिर भी मैं अपनी बात पर अड़ा रहा और उनसे निवेदन किया कि 10 मिनट के लिए ही सही आप प्रेस में चलिए ।मै सभी लोगो को प्रेस में रहने के लिए सूचित कर देता हूं ।आपको अपने बीच पाकर सारे नए पुराने कर्मचारी खुश हो जायेंगे । संपादकीय विभाग में कई ऐसे नए और युवा पत्रकार साथी है जो आपसे कभी नहीं मिले है ।रोज हमसे ही सामना होता है वे सभी साथी आपको अपने बीच पाकर काफी गौरवान्वित और खुश हो जायेंगे । ललित जी मेरे आग्रह को स्वीकार करते हुए बोले चलो ठीक है मैं चाय पीने प्रेस आऊंगा । उनकी बातों को सहजता से लेते हुए हम प्रेस पहुंच गए ।

थोड़ी देर में ललित जी प्रेस पहुंच गए और सम्पादकीय ,प्रबन्धन ,प्रसार,विज्ञापन और मशीन विभाग में कार्य करने वाले सभी लोगो से मिले मगर अधिकतर नए लोगो से मिलने पर कई ऐसे पुराने लोगो के बारे में नाम लेकर उन्होंने पूछा जो देशबन्धु से जा चुके थे । उसके बाद समाचारों को लेकर काफी देर तक हम लोगो से चर्चा करते रहे बीच बीच में राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर की राजनैतिक गतिविधियों की भी वे चर्चा करना नहीं भूले ।

प्रदेश और बिलासपुर संभाग की राजनैतिक चर्चा छेड़ते हुए अनेक बाते उन्होंने साझा की ।शायद वे यह जानना भी चाहते थे कि हम लोग राजनैतिक समीकरण के बारे में कितनी गहरी पैठ रखते है ।ललित जी तब 5 मिनट जगह एक घण्टे से भी ऊपर प्रेस में बिताए । हम सबको खुशी हुई कि उन्होंने हमारे आग्रह को स्वीकार किया । ललित जी बिलासपुर देशबन्धु की खबरों पर पैनी नजर रखते थे । कुछ त्रुटियां होती तो लाल घेरे में मार्किग कर पेपर भेज देते थे । वे एक बार शायद वर्ष 2015 में अचानकमार जाने के लिए बिलासपुर आए तो वहां के रेस्ट हाउस में रुकने के लिए वन विभाग के अफसरों से बात करने के लिए उन्होंने मुझसे कहा ।मै अफसरों से बात करने कोशिश ही करता रहा और थोड़ी देर बाद ललित जी ने मुझे फोन कर कहा कि अब किसी से बात करने की जरूरत नहीं है उनकी सी सी एफ से बात हो गई है । ललित जी आज हमारे बीच अब नहीं है मगर उनकी सहजता और उनके बीच बिताए पल हमेशा याद रहेगी । ईश्वर उनको अपनी चरणों में स्थान दें ।

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