बिलासपुर । वरिष्ठ भाजपा नेता और जीवन भर सुचिता की राजनीति करने वाले छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष बद्रीधर दीवान का देर शाम तोरवा के एक निजी अस्पताल में देहावसान हो गया ।वे 94 वर्ष के थे । भाजपा शासन काल में वे सबसे उम्र दराज विधायक थे ।उनके निधन से भाजपा में शोक व्याप्त है ।
श्री दीवान लम्बे समय से अस्वस्थ थे उसके बाद भी उन्होंने पिछले माह कोविद का टीका लगवाया था ।उन्हे निमोनिया के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था ।
अविभाजित मप्र में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे स्व.लखीराम अग्रवाल से उनका संबंध उस तरह नही था जैसे अन्य भाजपा नेताओं के रहे ।अपनी स्पष्टवादी राजनीति के चलते श्री दीवान को कई बार उपेक्षित भी होना पड़ा था फिर भी वे पार्टी नेताओं के समक्ष कभी नहीं झुके । भाजपा शासनकाल में वे एक मात्र छत्तीसगढ़िया ब्राम्हण विधायक थे फिर भी उन्हें मंत्री नही बनाए जाने को लेकर वे नाराज चल रहे थे ।छत्तीसगढ़ी ब्राम्हणों के लगातार दबाव के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री डा रमन सिंह को श्री दीवान को विधानसभा उपाध्यक्ष बनाना पड़ा था । श्री दीवान 4 बार सीपत के विधायक रहे वे सी एस आई डी सी के चेयरमैन भी रहे ।एमपी में वे विधायक रहे हुए राज्य परिवहन निगम के ऊपाध्यक्ष भी रहे ।
श्री दीवान अपनी खरी खरी बातो के लिए जाने जाते रहे । वर्ष 2004 में टिकट देने की बारी आई तो श्री दीवान के साथ ही पूर्व मंत्री मूलचंद खंडेलवाल की भी प्रबल दावेदारी थी जिस पर बड़ी ही चालाकी के साथ श्री दीवान और श्री खंडेलवाल की जोड़ी को तोड़ने के लिए श्री दीवान को टिकट देकर पार्टी के तत्कालीन नेताओं ने श्री खंडेलवाल को अलग थलग कर दिया । बिलासपुर में बद्रीधर दीवान ,मूलचंद खंडेलवाल, डी पी अग्रवाल ,मन्नू मिश्रा इन चारो नेताओं की अलग पार्टी से अलग तूती बोलती थी ।
श्री दीवान जिला भाजपा के अध्यक्ष भी रहे और इस दौरान लोकसभा चुनाव के खर्च और हिसाब को लेकर वे तत्कालीन अध्यक्ष लखीराम अग्रवाल से पंगा मोल लिया था । उस दौरान वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी श्री दीवान से बात कर मामला सुलझाने बिलासपुर आए थे । सर्किट हाउस से श्री मोदी ने श्री दीवान के घर संदेश भेज बातचीत की इच्छा जाहिर की तो श्री दीवान ने चुनावी हिसाब के विवाद पर बात करने से मना कर दिया इस पर श्री मोदी ने साथ बैठकर चाय पीने के लिए घर आने श्री दीवान को राजी कर उनके घर पहुंच गए और काफी देर तक उनसे वार्तालाप की मगर श्री दीवान ने तब बातचीत का खुलासा करने से साफ मना कर दिया था ।
कालांतर में श्री दीवान उम्र के हिसाब से पार्टीगत समझौते करते हुए विधानसभा उपाध्यक्ष के पद पर पहुंच गए । उनके निधन से भाजपा ने एक स्पष्टवादी ,ईमानदार और मूल्यों की राजनीति करने वाला नेता को दिया है ।