तहसीलदार और अतिरिक्त तहसीलदार से परेशान है आम नागरिक। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राजस्व मंत्री जयसिंग अग्रवाल के पास इनकी के शिकायते।
- 26 Mar 2021

तहसीलदार और अतिरिक्त तहसीलदार से परेशान है आम नागरिक। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राजस्व मंत्री जयसिंग अग्रवाल के पास इनकी के शिकायते।
बिलासपुर 【स्टाफ़ रिपोर्टर】 तहसीलदार एन पी गवेल और अतिरिक्त तहसीलदार शेष नारायण जायसवाल के क्रियाकलापों से बिलासपुर शहर के आम नागरिक अत्यधिक परेशान है। कुछ माह पहले बिलासपुर तहसील में फेरबदल करते हुए अतिरिक्त तहसीलदार एन पी गवेल को तहसीलदार बनाते हुए उनके स्थान पर अतिरिक्त तहसीलदार के पद पर शेष नारायण जायसवाल को पदस्थ किया गया। परंतु आम नागरिकों को फायदा होने के बजाय अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बिलासपुर तहसील में एक कहावत चरितार्थ हो गई की गुरु तो गुरु चेला भी सुभान अल्लाह। अतिरिक्त तहसीलदार शेष नारायण जायसवाल बहुत ही कम समय अपने ऑफिस में रहते हैं। और जनता के महत्वपूर्ण कार्यों को नजरअंदाज करते हुए न जाने कहां रहते हैं और तहसील के बाबू नेताम एवं शुक्ला जी से हमेशा अपडेट लेते रहते है। कभी कभार अतिरिक्त तहसीलदार महोदय आते भी हैं तो अपने रूम में बैठ जाते हैं और कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों जमीन दलालों के प्रकरणों को फास्ट एक्शन मूड में हल करते हुए निकल जाते हैं। आम आदमियों को इतनी हिम्मत है नहीं होती कि वह अतिरिक्त तहसीलदार के रूम में जाकर अपनी व्यथा सुनाएं वहां तो पहले से ही प्रभावशाली व्यक्तियों का जमघट लगा रहता है। अपने पक्षकारों के राजस्व संबंधी मामले निपटाने वाले अधिवक्ता गण भी अतिरिक्त तहसीलदार शेष नारायण जायसवाल से अत्यधिक परेशान है। यदि कोई व्यक्ति उनसे अपने प्रकरण सुलझाने की बात करता है तो उनका जवाब बहुत ही घटिया और शासकीय कार्यकलापों के खिलाफ रहता है। अतिरिक्त तहसीलदार आम परेशान व्यक्तियों को वह किस तरह राज्य प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास की है उसकी कहानी सुनाने लग जाते हैं। बिलासपुर तहसील में प्रतिदिन सैकड़ों राजस्व के प्रकरण आते हैं और पहले से ही हजारों प्रकरण पेंडिंग है परंतु अतिरिक्त तहसीलदार शेष नारायण जायसवाल पूरा दिन फालतू कामों में समय खराब कर आम नागरिकों को शासन के खिलाफ करने में कोई कसर नहीं उठा रहे हैं। फाइल अवलोकन नामांतरण की बात कह कर सैकड़ों फाइलों को अतिरिक्त तहसीलदार अपने घर में जंप कर रखा हुआ है। और परेशान नागरिक इनके बाबू श्री शुक्ला जी से अपने फाइल के विषय में पूछते हैं तो शुक्ला जी का जवाब रहता है की अरे आपकी फाइल तो जायसवाल साहब फ्रंट सीट में रखें और बहुत जल्द फाइल का निराकरण करेंगे। परंतु कल करते-करते माह बीत जाता है परंतु फाइल का निराकरण नहीं होता बाध्य होकर परेशान नागरिक तहसील आना बंद कर देता है और अतिरिक्त तहसीलदार शेष नारायण जायसवाल की मन की मुराद पूरी हो जाती है। अतिरिक्त तहसीलदार शेष नारायण जायसवाल के जनता विरोधी क्रियाकलाप को पटवारियों द्वारा बहुत अच्छे ढंग से अवलोकन किया जाता है और वह भी आम जनता से ठीक वैसा ही व्यवहार करता है जैसे कि उनके साहब अतिरिक्त तहसीलदार शेष नारायण जायसवाल करते हैं। यही हाल तहसीलदार नारायण प्रसाद गवेल का भी है। कुछ महीने पहले ही वे अतिरिक्त तहसीलदार से तहसीलदार बने हैं वह भी बिलासपुर तहसील में ही तहसीलदार नारायण प्रसाद गवेल का पद अतिरिक्त तहसीलदार शेष नारायण जायसवाल से बड़ा है इस कारण उनकी जवाबदेही आम जनता के प्रति अधिक है। आम जनता को तहसीलदार नारायण प्रसाद गव्हेल के दर्शन कम ही होते हैं। वे कहां रहते हैं क्या करते हैं किसी को नहीं मालूम है। परंतु क्राइम एंड इन्वेस्टिगेशन की टीम ने अपने स्तर पर पतासाजी की तो पता चला की तहसीलदार नारायण प्रसाद गव्हेल का एक सरकारी आवास नूतन कॉलोनी में है वे अधिकतर समय वहीं बैठ कर अपने खासम खास और प्रभावशाली व्यक्तियों के उल्टे सीधे प्रकरणों का निराकरण करते हैं। आम जनता यह सोचती है कि अब आएंगे साहब कब आएंगे साहब परंतु पूरा दिन निकल जाता है परंतु तहसीलदार नारायण प्रसाद गव्हेल के दर्शन नहीं होते। तहसीलदार कोर्ट में भी नारायण प्रसाद गव्हेल फुल एक्शन में रहते हैं डायस में कई बार फोन आते हैं और खास फोन आते ही वह डायल में सुनवाई की फाइल छोड़कर अचानक अपने कमरे में चले जाते हैं और दरवाजा अंदर से बंद हो जाता है और घंटों अपने खासम खास के प्रकरणों को उल्टे सीधे रुप से निपटा ते हैं। तहसीलदार नारायण प्रसाद गवेल के क्रियाकलापों से अधिवक्ता गण भी काफी परेशान है। वे अपने पक्षकारों को किस तरह मैनेज करते हैं यह वही जाने। राजस्व कर्मचारियों के क्रियाकलाप से कलेक्टर सारांश मित्तर भी काफी परेशान है। इस कारण वह हाल ही में राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को स्पष्ट रूप से कह दिया की तहसीलदार अतिरिक्त तहसीलदार पटवारियों और अन्य राज्य कर्मचारियों की शिकायतें सुन सुन कर उनके कान पक गए। बिलासपुर तहसील में चल रही आम जनता विरोधी गतिविधियों से ऐसा लग रहा है कि यह राजस्व अधिकारी जानबूझकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के जनोपयोगी योजनाओं को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश रच रहे हैं।