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April 4, 2025 11:55 pm

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महिला एवं बाल विकास विभाग के धन कुबेरों की सम्पत्ति की जांच होनी चाहिए , 15 ,20 सालों से एक ही जगह पदस्थ रहकर बहुतों ने अकूत सम्पत्ति जमा की है

बिलासपुर । महिला एवं बाल विकास विभाग में बड़े पैमाने पर तबादले के लिए संचालनालय में बैठे बड़े अधिकारी जिम्मेदार है जिन्होंने मनमाने तौर पर जिला मुख्यालयों में बैठे कतिपय पसंदीदा अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर 15 साल से तबादलों के लिए कोई कार्रवाई ही नही की और अच्छे तथा काम करने वाले अमलो को जानबूझकर दूरस्थ जंगल क्षेत्र में पदस्थ किये रहे और पसंदीदा अमले को नियम विरुद्ध पद नही होने के बाद भी सालों साल एक ही जगह पर बिठाकर और अटैच करके रखा । अब जबकि कांग्रेस की सरकार बनने के बाद विभागीय मंत्री श्रीमती अनिला भेड़िया ने 15 साल की गन्दगी को साफ करने और विभाग में कसावट लाने तबादले का चाबुक चलाया है तो विभाग के संगठित गिरोह की तरह काम करने वालों को तकलीफ हो रही है । कायदे से पूरे प्रदेश में जो अधिकारी और कर्मचारी एक ही जगह पर 15 से 20 साल तक अंगद के पांव की तरह जमे रहे उनकी विभागीय तौर पर सम्पत्ति की जांच की जानी चाहिए । क्योंकि कई अधिकारी इस दौरान धन कुबेर बन चुके है । इसका उदाहरण इसी बात से मिलता है कि रायपुर में पदस्थ एक अधिकारी का तबादला रुकवाने एक ऐसे शख्स की सिफारिश हो रही थी जिसकी आय करोड़ों में है ।

पिछले सप्ताह से महिला एवं बाल विकास विभाग में लगातार तबादले हो रहे है । अभी संचालनालय में बैठे अधिकारियों पर हाथ नही डाला गया है और सूत्र बताते है कि वहां पर भी बड़ा फेरबदल शीघ्र होगा । अभी तक के तबादलों में मोटे तौर पर रायपुर शहरी क्षेत्र के 18 पर्यवेक्षक और बिलासपुर जिले में 30 पर्यवेक्षकों का तबादला हो चुका है । आशचर्य यह है तबादले के विरोध बिलासपुर जिले में ज्यादा हो रहा है और तबादला रुकवाने बिलासपुर से ही ज्यादा सिफारिश करवाया जा रहा है । इसमें कांग्रेस के ही कुछ नेता यह जानकर भी लगे हुए है कि जिनकी वे सिफारिश कर रहे है वे एक ही जगह पर 15 से 20 साल तक पदस्थ रही है ।

बहरहाल तबादलों पर एक नजर सरसरी तौर पर डाले तो कई ताज्जुब बाते मिलेंगी । बिलासपुर जिले के तखतपुर परियोजना अंतर्गत सकरी में पर्यवेक्षक के तौर पर पदस्थ बीना राय 26 अक्टूबर 1998 से पदस्थ है । 20 वर्ष बाद डॉक्टर पुत्री बीना राय का तबादला किया गया है ।रंजनादिवेदी बिलासपुर में वर्ष 2014 से पदस्थ हैं । इनके पति जलसंसाधन विभाग में अधिकारी है । 5 साल बाद इनका तबादला किया गया । आकांक्षा गुप्ता वर्ष 2012 से पदस्थ थी इनका भी तबादला किया गया । इनके पति एलआईसी में अधिकारी रह चुके है । सकरी में पदस्थ वंदना कोसले के पति भाजपा के जनपद अध्यक्ष रहे । तबादला होने के बाद 2016 में ये फिर आ गई और रेडी टू इट का संचालन भी कर रही थी । इसी तरह मोनिका मौर्य वर्ष 2012 से पदस्थ थी । इनके भाई जेलरऔर मां विभाग में ही सुपरवाइजर पद से रिटायर हुए । किरण खेड़कर वर्ष 1998 से पदस्थ थी । इनके पति विद्युत मंडल में है । जयश्री नामदेव वर्ष 2012 से पदस्थ थी इनके पति नगर निगम में ठेकेदार है । सबसे ज्यादा रोचक मामला प्रकृति भट्ट का है ये वर्ष 2017 में बेमेतरा में पदस्थ थी । उन्हें जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेश सिंह की पहल पर बिलासपुर कार्यालय में अटैच किया गया जबकि जिला कार्यालय में उनकेलिए कोई पद नही था ।उनका वेतन भी दूसरे जिले से आहरण किया जाता रहा । जिले के कोटा क्षेत्र में पर्यवेक्षक के 13 पद है मगर प्रकृति भट्ट को पर्यवेक्षक के 14वे पद पर बिठा दियागया और बिलासपुर कार्यालय में काम दिया गया । । पूर्णिमा उपाध्याय वर्ष 2017 से जिला कार्यालय में पदस्त रही मगर वेतन दूसरे जगह से निकलता रहा । इस तरह का अटैच का खेल संचालनालय से चलता रहा है । संयुक्त संचालक स्तर के अधिकारी के शह पर यह सब कुछ होता रहा है ।

शशिप्रभा गुप्ता का भी तबादला किया गया है इनके पति का पानी की फैक्ट्री है । इसी तरह वर्ष 2014से प्रेमलता साहू पदस्त रही । इनके पति अन्य जिले में चिकित्सक है । वर्ष 2014 से संजू तिवारी जिले में पदस्त थी जबकि एल एन रोमना एक्का तो वर्ष 1997 से थी इनके पति स्टेट बैंक में अधिकारी दूसरे जिले में है । श्याम नारायण गोले वर्ष 2005से है पहले ये बिल्हा में ग्राम सेवक थे मगर पद बदलकर सुपरवाइजर हो गए ।। पुष्पलता अग्रवाल तो वर्ष 1997 से और शारदा देशमुख 1997 ,और शुषमा नामदेव भी 1997 से थी ।

मस्तूरी में 2005 से सेवारत शशिप्रभा गुप्ता बेटी के नाम पर मेडिकल स्टोर्स चलाती हैं । इनके पति ट्रेनिग सेंटर बिलासपुर में अधीक्षक पद पर थे । संगीता यादव 2017 से है उसके पहले वे मस्तूरी में थी । इनकी अनेक गम्भीर शिकायतें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने की थी । हरिप्रिया पटेल 2010 से थी । इसकी भी कार्यकर्ताओं ने लगातार शिकायत कीथी ।।शशिकला सिंह वर्ष 1998 से थी । स्वधर पांडेय की पोस्टिंग 2014 से सीपत में थी मगर जिला कार्यालय में अटैच रही । जशोमनी भगत 2006 से ,सुधा पांडे सुधा 2009 से ,अर्चना चौहान 2009 से ,अश्वनी डहरिया 2000से बबिता सिंह 2012 से ,प्रतिमा बी पांडेय 2006 से और प्राची सिंह 2014 से जिले में थी । इन सबका तबादला लंबे समय के कारण करते हुए सभी को फील्ड में काम करने भेजा गया है ।

अब बात करे परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ)की तो एक है साजिद मेमन जो संचालनालय महिला एवं बाल विकास विभाग रायपुर में 5,9,2002 से पदस्त हैं मगर ये पोषण अभियान अंतर्गत संयुक्त परियोजना समन्वयक पद के विरुद्ध काम करने का इन्हें अवसर प्रदान कर दिया गया । इनका 17 साल बाद तबादला हो पाया है । इसी तरह शालिनी दलेला है जो क्षेत्रीय महिला प्रशिक्षण संस्थान बिलासपुर में 2012 से है मगर ये संकाय सदस्य ,सहायक संचालक संवर्ग के पद के विरुद्ध काम कर रही थी । इनका तबादला कांकेर के कोयलिबेड़ि किया गया है ।

बिल्हा में 2017 से जमे अतुल दांडेकर कुदुदण्ड बिलास पुर के है । पहले ये कोरबा में थे । संघप्रेमी दांडेकर का तबादला दन्तेवाड़ा किया गया है ।बिल्हा सरकंडा2 में 2014 से कार्यरत और इसके पहले 2006 से ही जिले में घूम रहे सूर्यकांत गुप्ता भी स्थानांतरित किये गए है । कौड़िया मस्तूरी की रहने वाली दीप्ति पटेल 2017 से तखतपुर में थी मगर यह भी बेमेतरा से बिलासपुर आई थी ।अब इनका तबादला धमतरी किया गया है ।

सकरी में 2014 से सेवा दे रही बिलासपुर निवासी अनुराधा आर्या को कोंडागांव भेज गया है । पुष्पा कुजूर गौरेला में 2017 से थी मगर पिछले 15 साल से वे बिलासपुर जिले में ही पदस्थ रही है इसलिए उन्हें कोंडागांव भेजा गया है । सीपत और मस्तूरी के दोहरे प्रभार देख रहे उमाशंकर गुप्ता की सम्पति की जांच हो जाये तो कई राज खुलेंगे । इन्हें जशपुर मनोरा भेज गया है ।

रायपुर शहरी क्षेत्र में 2013 से कार्यरत अरुण पांडे की भी रायपुर से छुट्टी कर दी गई है ।उमाकांत तिवारी को अधिकारियों ने जानबूझकर 2016 से बालोद में रखा गया था । उन्हें अब रायपुर शहरी में लाया गया है । वर्ष 2017 से राज्य स्तरीय संसाधन केंद्र में पद नही रहने के बाद भी जमे रहे परियोजना अधिकारी सुभाष चन्द्र मिश्रा को फील्ड में काम करने मंदिर हसौद भेज दिया गया है ।

तबादले का डंका बजने के बाद भी बिलासपुर के जिला कार्यक्रम अधिकारी और 2003 से जिले में व 2014 से जिला कार्यालय में पदस्थ परियोजना अधिकारी पर तबादला का कोई असर नही पडा है क्योंकि ये अभी भी सुरक्षित हैं । बिलासपुर में तबादले से पीड़ित पर्यवेक्षक और परियोजना अधिकारियों को बरगलाने और उन्हें लामबंद करने में कुछ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है ।

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