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April 4, 2025 8:37 pm

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चौथी फेल से ग्रेजुएट तक है पार्षद और महापौर के दावेदार, 5 दिसम्बर के पहले प्रत्याशियों की घोषणा सम्भव नही , भाजपा पुराने चेहरों की कर सकती है छुट्टी

बिलासपुर । नगर निगम चुनाव के लिए प्रशासन ने युद्धस्तर पर तैयारी शुरू कर दी है वही काँग्रेस भाजपा में पार्षद प्रत्यासी के लिए लगातार बैठके हो रही है । ज्यादातर दावेदार महापौर बनने का सपना देख रहे है और इसी लिए पार्षद की टिकट के लिए जूझ रहे है । विधानसभा में मिली करारी हार के चलते भाजपा पार्षद प्रत्याशी चयन करने में काफी सावधानी बरत रही है चर्चा तो यह भी है कि भाजपा कई पुराने पार्षदो की छुट्टी कर नए चेहरों को मौका देने की तैयारी में है वही काँग्रेस में एक अनार सौ बीमार की स्थिति है । काँग्रेस में महापौर बनने की लालसा रखने वालों की संख्या काफी है मगर लाख टके का सवाल यह है कि पार्षद के लिए प्रत्याशियों का फाइनल चयन कौन करेगा? गुटीय विवाद में प्रत्याशियों का नुकसान हो सकता है । वैसे खबर यह भी है कि 5 दिसम्बर के पहले किसी भी दल का प्रत्याशी घोषित होने की कोई गुंजाइश नही है ।

महापौर का चुनाव सीधे मतदाताओं के द्वारा नही होने और पार्षदो के द्वारा चयन किये जाने की व्यवस्था से बहुत सारे नेताओं की उम्मीदों पर पानी फिर गया है । वैसे यह फौरी तौर पर तो दावेदारों की भीड़ कम करने के लिए बेहतर विकल्प है मगर खटरास लोगों के पार्षद निर्वाचित होकर आ जाने से महापौर दावेदारों की संख्या से काँग्रेस भाजपा दोनों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी । अभी पार्षद के लिए प्रत्याशियों की अधिकृत घोषणा नही हुई है मगर दर्जनों दावेदारों ने वार्डो में घूम घूमकर प्रचार और जनसम्पर्क शुरू कर दिया है । काँग्रेस भाजपा में दावेदारों और टिकट के लिए आवेदन कर्ताओं पर नजर डालें तो पता चलता है कि 4 थी फेल से ग्रेजुएट का आवेदन है और 4थी फेल दावेदार भी महापौर बनने का सपना देख रहे है जबकि पार्षद चुनाव जीतने की कोई गारंटी नही है ।

पार्षद पद के लिए दावेदारों की लंबी सूची है जिस पर दोनो दलों की वार्डवार बैठक जारी है हालांकि प्रत्याशी चयन स्थानीय स्तर पर होना नामुमकीन है और प्रदेश चुनाव कमेटी ही अधिकृत घोषणा करेगी । जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक 5 दिसम्बर के पहले किसी भी दल द्वारा प्रत्याशियों की घोषणा कर पाना सम्भव नही है । भाजपा द्वारा 2 दिसम्बर को पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय की उपस्थिति में तमाम दावेदारों की बैठक जिला भाजपा कार्यालय में आहूत की गई है जहां सर्वानुमति से नाम फाइनल कर पाना मुश्किल है । भाजपा ने नगरीय निकाय चुनाव प्रभारी पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल को बनाया है मगर वे भी नगर निगम के पूरे 70 पार्षदों की टिकट अपनी इच्छा से घोषित नही कर पाएंगे । सम्भागीय समिति जिसमे नेता प्रतिपक्ष धरम लाल कौशिक ,सांसद अरुण साव मेयर किशोर राय व भूपेंद्र सवन्नी के साथ ही विधायको डॉ कृष्णमूर्ति बांधी व रजनीश सिह तथा पूर्व प्रत्याशी हर्षिता पांडेय की भी प्रत्याशी चयन में दखल रहेगी ।ऐसा शायद गुटीय सन्तुलन के हिसाब से जिम्मेदारी सौंपी गई है ।
भाजपा में कई बार पार्षद रह चुके लोगो ने भी मेयर की दावेदारी करने पार्षद की मांग स्वभाविक रूप से की है मगर ऐसे कई प्रमुख दावेदारों को निराश होना पड़ सकता है । भाजपा लोकसभा चुनाव की तर्ज पर नए चेहरों के बलबूते नगर निगम में बहुमत लाने की कवायद कर रही है ।
इधर काँग्रेस के दावेदार राज्य में सत्ता होने का लाभ मिलने की उम्मीद कर रखे है मगर टिकट वितरण में किसकी चलेगी और किसकी ज्यादा चलेगी इसको लेकर बड़ा सवाल है । पार्षद की टिकट बांटने में सिर्फ काँग्रेस संगठ न की ही चलेगी या फिर विधायको की पसन्द को भी अहमियत दी जाएगी इस पर भी उहापोह की स्थिति है । विधायको की पसन्द और संगठन की पसन्द में यदि विरोधाभास होगा तो ऐसी स्थिति में क्या होगा ? बिलासपुर में विधायक और संगठन के बीच सम्बन्ध सहज नही है इसका असर निगम चुनाव में न पड़े इसके लिए क्या रणनीति रहेगी यह भी प्रश्न अभी अनुत्तरित है ।
निगम का चुनाव परिणाम अब सिर्फ शहर तक सीमित नही रह गया है बल्कि 18 गांव के निगम में शामिल हो जाने से नतीजे चौकाने वाले हो सकते है ।

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