बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार काबिज हो गई है। भूपेश बघेल सरकार के दौरान नियुक्त किए गए सभी निगमों ,मंडलों और आयोगो के पदाधिकारी की छुट्टी हो गई है ।अब सारे निगम ,मंडल और आयोग में नई नियुक्तियां शुरू हो जाएगी ।भारतीय जनता पार्टी के सरकार द्वारा मंत्रिमंडल के गठन में देरी और उस के बाद विभाग आवंटन में हो रही देरी से लगता नहीं कि निगम और आयोग तथा मंडलो में राजनीतिक नियुक्तियां बहुत जल्द हो जाएगी ।इतना तो निश्चित है कि ये सभी राजनीतिक नियुक्तियां लोकसभा चुनाव के बाद ही हो पाएगी ।
भूपेश बघेल सरकार में एक महत्वपूर्ण विभाग मार्कफेड के अध्यक्ष और संचालक मंडल की नियुक्ति पूरे 5 साल तक नहीं की जा सकी थी ।भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में राधा कृष्ण गुप्ता मार्कफेड के अध्यक्ष बनाए गए थे उसके बाद भाजपा की सत्ता जाने के बाद भूपेश बघेल सरकार ने इस विभाग में कोई नियुक्तियां नहीं की ।अब जबकि भारतीय जनता पार्टी की सरकार राज्य में पुनः वापसी हो गई है ऐसी स्थिति में मार्कफेड के अध्यक्ष की नियुक्ति हो सकेगी ऐसा माना जा रहा है ।राधा कृष्ण गुप्ता के अध्यक्षीय कार्यकाल में शशिकांत द्विवेदी मार्कफेड के उपाध्यक्ष हुआ करते थे ।श्री द्विवेदी अब अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार हैं क्योंकि राधाकृष्ण गुप्ता अब उम्रदराज हो चुके है।श्री द्विवेदी सहकारिता के क्षेत्र में अच्छे जानकार और अनुभवी हैं। मार्कफेड में उसकी की नियुक्ति की जाती है जो सहकारिता के अच्छे जानकार हों ।यह भी कहा जाता है कि राजनीति की पहली सीढ़ी सहकारिता है ।जो नेता सहकारिता में जम जाए उसे राजनीति के अन्य पदों पर भी जल्द नियुक्ति मिल जाती है।
मार्कफेड का मुख्य काम बारदाना खरीदी से लेकर धान खरीदी की निगरानी, राइस मिलरो से लेवी का चावल जमा करवाने ,खरीदी केंद्रों से धान का उठाव और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण कार्य है । अब चूंकि सरकार बदलने और बनाने में *किसान और धान खरीदी*की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है इसलिए मार्कफेड के अध्यक्ष पद पर और संचालक मंडल की नियुक्ति जरूरी हो जाता है। भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव में टिकट वितरण से लेकर सरकार के गठन और मंत्रिमंडल चयन में नए चेहरों को महत्व दिया है इसलिए बहुतों को निगम,मंडल और आयोगों में एडजस्ट कर उन्हें उपकृत किया जायेगा लेकिन मार्कफेड ऐसा विभाग है जिसमे नियुक्त किए जाने वाले वाले को सहकारिता का पूरा ज्ञान हो इसलिए इसमें नए चेहरों का कोई गुजाइश नही है। इसी तरह जिला सहकारी केंद्रीय बैंको में भी सहकारी समितियों के चुनाव के पहले अध्यक्ष की नियुक्ति संभावित है इन नियुक्तियों में भाजपा के ऐसे नेताओ और कार्यकर्ताओं को तरजीह दी जाएगी जो सहकारिता के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हो और सरकार की योजनाओं को नीचे स्तर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हों। फिलहाल मार्कफेड के चेयरमैन की नियुक्ति इसी खरीफ और रबी के सीजन में हो तो ज्यादा बेहतर हो सकता है ।