
बिलासपुर। गुरू घासीदास विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय) में दिनांक 09 मार्च 2024 को केरल राज्य के 50 विद्यार्थी पांच नोडल अधिकारी शिक्षकों के साथ युवा संगम कार्यक्रम के चौथे चरण के अंतर्गत पांच दिवसीय भ्रमण पर आएंगे। उल्लेखनीय है कि युवा संगम कार्यक्रम के चौथे चरण में गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर छत्तीसगढ़ को भारतीय प्रबंधन संस्थान, कोझीकोड केरल साथ युग्म किया गया है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल ने केरल के सदस्यों के छत्तीसगढ़ आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा आगंतुक सदस्यों को छत्तसीगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया जाएगा। कुलपति महोदय प्रोफेसर चक्रवाल ने कहा कि केरल और लक्ष्यद्वीप से छत्तीसगढ़ भ्रमण करने पधारे युवाओं को यहां की कला व संस्कृति को नजदीक से जानने का एक बहुत ही बेहतरीन अवसर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केरल से आने वाले सभी सदस्य विश्वविद्यालय से अविस्मणीय स्मृतियों को अपने साथ संजोकर ले जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने एवं युवाओं को देश की समृद्ध वैभवशाली एवं गौरवशाली परंपराओं से अवगत कराने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए युवा संगम कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है।
*युवा संगम कार्यक्रम में पांच ‘पी’ अहम*
इस कार्यक्रम के अंतर्गत युवाओं में विभिन्न राज्यों के प्रति आपसी सामंजस्य एवं समझ को बढ़ाना अहम है। युवाओं में पर्यटन, परंपरा, प्रगति, प्रौद्योगिकी एवं परस्पर संपर्क को विकसित करना तथा युवाओं में कला व संस्कृति, तकनीक, नवाचार एवं उद्यमिता, खेल, पर्यावरण संरक्षण, वाणिज्य, व्यापार एवं प्रबंधन के विषय की जानकारी देना भी शामिल है।
*केरल के विद्यार्थियों का भ्रमण कार्यक्रम*
दिनांक 09 मार्च को मदकू द्वीप एवं तालागांव के भ्रमण पर जाएंगे जहां वे छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास की जानकारी प्राप्त करेंगे तथा 10 मार्च को यह दल छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थल मैनपाट जाएगा।
Sat Mar 9 , 2024
बिलासपुर। गुरू घासीदास विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय) में केरल राज्य के 50 विद्यार्थी एवं पांच नोडल अधिकारी शिक्षकों के साथ युवा संगम कार्यक्रम के चौथे चरण के अंतर्गत पांच दिवसीय भ्रमण पर आए दल ने शनिवार 9 मार्च 2024 को मदकूद्वीप और ताला गांव स्थित देवरानी-जेठानी मंदिर तथा पुरातात्विक धरोहरों का […]