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April 4, 2025 11:26 pm

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सरकारी जमीन को बेचने वाला सेमरताल का कोटवार बर्खाश्त, जमीन वापस लेने कलेक्टर का आदेश, मगर पटवारी और तहसीलदार को अभयदान

बिलासपुर। सेमरताल के कोटवार के खिलाफ सरकारी जमीन को बेचे जाने की शिकायत पर कलेक्टर अवनीश शरण ने कार्रवाई करते हुए कोटवार को मिली सरकारी जमीन को वापस लेने के आदेश के साथ ही कोटवार को बर्खाश्त करने का आदेश दिया है लेकिन सरकारी जमींन को निजी बताने, रजिस्ट्री पश्चात् नामान्तरण  करने और उसे राजस्व रिकार्ड में दर्ज करने वाले तत्कालीन पटवारी और तहसीलदार को बख्श दिया गया है यानि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यदि पटवारी और तहसीलदार  कोटवार को शासन की और से मिले जमीन को निजी जमीन के रूप में होना नहीं बताते तो न नामंत्रण होता और न ही क्रय करने वाले के नाम पर राजस्व रिकार्ड में दर्ज किया जाता। कलेक्टर ने फिलहाल कोटवार के कार्रवाई का आदेश दिया है.

गुरुवार को कलेक्टर द्वारा जारी आदेश भी पढ़ें

*कलेक्टर ने कोटवारी जमीन के अवैध बिक्री का लिया संज्ञान, दोषी कोटवार को किया बर्खास्त*

*बेची गई जमीन शासन के पक्ष में फिर से दर्ज करने दिए निर्देश*

कलेक्टर अवनीश शरण ने प्रतिबंध के बावजूद अवैध तरीके से कोटवारी जमीन विक्रय मामले पर बड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने कोटवार को सेवा से बर्खास्त करने के साथ ही जमीन फिर से शासन के पक्ष में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। मामला जिला मुख्यालय से लगे ग्राम सेमरताल का है।

तहसील कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार संपूर्ण मामला इस प्रकार है कि ग्राम सेमरताल के सरपंच द्वारा जिला कलेक्टर बिलासपुर अवनीश कुमार शरण को लिखित में यह सूचना दी गई थी कि सेमरताल का कोटवार परमेश्वर दास मानिकपुरी ने ग्राम सेमरताल महल नंबर 1 के खसरा नंबर 532 एवं 553 की कोटवारी भूमि को छलपूर्वक विक्रय किया है। जबकि शासन के निर्देशानुसार कोटवारी भूमि के विक्रय पर प्रतिबंध लगा हुआ है। उक्त सूचना प्राप्त होते ही अनुविभागीय राजस्वअधिकारी पीयूष तिवारी के निर्देशानुसार नायब तहसीलदार बिलासपुर राहुल शर्मा ने तत्काल प्रकरण दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। उन्होंने जांच में यह पाया कि सेमरताल महल नंबर 1 के खसरा नंबर 532 एवं 553 की कोटवारी भूमि को अवैध तरीके से कोटवार परमेश्वर दास मानिकपुरी द्वारा विक्रय किया है। जांच में ग्राम कोटवार सेमरताल को कारण बताओं नोटिस जारी कर उसका जवाब भी लिया गया । जवाब संतोष जनक नहीं होने तथा ग्राम कोटवार की कोटवारी भूमि का अवैध विक्रय किए जाने पर कोटवार की संदिग्ध भूमिका होने पर कोटवार को सेवा से बर्खास्त किया गया। तथा पुनः ग्राम नौकर भूमि खसरा नंबर 532 एवं 533 को शासन के पक्ष में दर्ज किए जाने का आदेश पारित किया गया।

गौरतलब है कि वर्तमान में जिला कलेक्टर बिलासपुर अवनीश कुमार शरण ने अपने जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारियों तथा तहसीलदार एवं नायब तहसीलदारों को यह निर्देश दिया है कि प्रत्येक ग्राम के कोटवारी भूमि की जांच की जाए और अगर ऐसी स्थिति पाई जाती है कि किसी भी ग्राम में अवैध तरीके से कोटवारी भूमि का क्रय विक्रय किया गया है तो उस पर संज्ञान लेकर उसकी जांच की जाए तथा विधिवत कार्रवाई की जाए।

 

CBN36 द्वारा पूर्व में प्रकाशित खबर

बिलासपुर ।सरकार द्वारा गावो में कार्यरत कोटवारों को मानदेय के अलावा जीवन निर्वाह के लिए जमीन दी जाती है जिसमे कोटवार अन्न उपजाकर अपने परिवार को पालता है ।शासन द्वारा प्रदत्त कोटवारी जमीन कोटवार के निधन या  कोटवार बदलने के साथ ही स्वमेव कार्यरत कोटवार को मिल जाता है लेकिन सेमरताल के कोटवार ने तो गजब ही कर दिया ।

शिकायत के मुताबिक कोटवार ने अपना एक पावर आफ अटार्नी नियुक्त कर उसके माध्यम से सरकारी जमीन का सौदा कर एक माह के भीतर ही रजिस्ट्री और नामांतरण करवा दिया जबकि नामांतरण के लिए कई पेशी,सुनवाई,इश्तहार ,दावा आपत्ति की प्रक्रिया पूरी करने में कई माह लग जाते है । बात सेमरताल के कोटवार की हो रही थी तो शिकायत के मुताबिक  सेमरताल में कार्यरत कोटवार मेहतर के बाद रामायण कोटवार बना और उसके निधन उपरांत वर्ष 2019 में रामेश्वर कोटवार बन गया ।कोटवारी जमीन वहां के पटवारी और पंचायत के रिकार्ड में तीन खसरा नंबर में है जिसकी पर्ची भी बनी हुई है राजस्व और ग्राम पंचायत के रिकार्ड में कोटवारी जमीन किसी कोटवार के नाम पर नही है ।खसरा नंबर 532 ,553,महल नंबर एक के नाम से चलते आ रहा है लेकिन कोटवार परमेश्वर ने गजेंद्र साहू को अपना पी ओ ए नियुक्त कर दिया उसके बाद पटवारी ने उक्त जमीन को निजी दर्ज कर दिया ।उसके बाद जमीन को गजेंद्र साहू ने  पुरषोत्तम साहू को क्रय करते हुए 6 जुलाई 23 को रजिस्ट्री करवा दिया और एक माह के भीतर ही 23 अगस्त 23 को नामांतरण आदेश तत्कालीन तहसीलदार के कोर्ट से पारित करवा लिया गया। बिक्री की गई कुल भूमि 19 डिसमिल है।सरकारी जमीन को तत्कालीन पटवारी योगेंद्र सिंह ने राजस्व रिकार्ड में निजी भूमि दर्ज कर दिया उसके बाद बिक्री पश्चात सेंदरी निवासी  पुरषोत्तम साहू के नाम पर भी रिकार्ड में दर्ज कर दिया ।यह भी शिकायत है कि कोटवार परमेश्वर ने सरकारी जमीन 5 एकड़ 53 डिसमिल को गतौरी निवासी अश्वनी सोनवानी के पास 4 साल पूर्व बिक्री का सौदा किया था लेकिन बात नहीं बनने पर उसी जमीन को बेचने का सौदा गतौरी के सेवानिवृत  रविंद्र शुक्ला  से किया ।विवाद की स्थिति में उक्त जमीन पर वर्तमान में बिलासपुर के एक प्रभावी व्यक्ति का कब्जा है।इसी तरह 18 डिसमिल जमीन अमृत धीवर को बेचे जाने की चर्चा है।  यह भी बताया जा रहा है कि कोटवार द्वारा सरकारी जमीन को बेचे जाने की  शिकायत होने पर पटवारी ने एस डी एम बिलासपुर को एक प्रतिवेदन पेश कर बताया है कि उक्त जमीन के राजस्व संधारण में त्रुटि वश  गलत नाम अंकित हो गया है। जबकि पटवारी ने नामांतरण आदेश का पालन करते हुए जमीन क्रय करने वाले पुरुषोत्तम साहू के नाम पर आनन फानन में  न केवल जमीन चढ़ा दी है बल्कि उसके नाम पर ऋण पुस्तिका भी बना दिया है । राजस्व विभाग के अधिकारियों और जिला प्रशासन  को इस गड़बड़ झाले पर संज्ञान लेना चाहिए और शिकायत की जांच करते हुए सरकारी जमीन की बिक्री को सुन्य घोषित करते हुए इसमें जो भी लोग शामिल है उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए । इस बारे में सेमरताल के सरपंच राजेंद्र साहू से बात की गई तो उन्होंने संक्षित में यही कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है और उन्होंने राजस्व  मंत्री और कलेक्टर  से मामले की जांच के लिए आवेदन दिया है । 

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