बिलासपुर । कोरोना वायरस के कारण लगाए गए लॉक डाउन का असर वैसे तो हर वर्ग पर पड़ रहा है मगर नशे के आदी लोगो के लिए और भी मुश्किल हो गया है । शराब मिल नही रही और चोरी छिपे यदि बिक रही है तो उसकी कीमत कई गुना ज्यादा है । गुटखा , तम्बाकू और गुड़ाखु का नशा करने वालो की संख्या शराब पीने वालों की संख्या से कई सौ गुना ज्यादा है । एक सर्वे में शराब की बिक्री से जितनी आय होती है उससे कई गुना ज्यादा गुटखा ,तम्बाकू और गुड़ाखु से होती है क्योंकि इनका सेवन करने वालो की संख्या लाखो में और इससे पीड़ित बच्चे व महिलाएं भी है । ये सारी चीजें लॉक डाउन के कारण नही मिल रही है । इसे पाने के लिए लोग मारपीट से लेकर कई वारदात भी कर रहे । गांवों में बनने वाली देशी शराब से ही कुछ लोग काम चला रहे । कोटा क्षेत्र में आबकारी दारू पकड़ने गई आबकारी विभाग की टीम पर हमला और तोरवा में गुड़ाखु बाटने वाली महिला व उसके साथियों पर अपराध दर्ज होना इस बात का प्रमाण है ।
लॉक डाउन का पालन सब करना चाह रहे है इच्छा से भी और अनिच्छा से भी क्योकि जान सबको प्यारी है यही वजह है कि 21 दिनों के लॉक डाउन का जैसे तैसे लोगो ने पालन किया और तमाम तकलीफें सहकर भी कोरोना से बचाव के लिए योगदान दिया मगर कल जब प्रधानमंत्री ने 3 मई तक के लिए लॉक डाउन जारी रखने की घोषणा की तो उन लोगो के आंखों में जरूर आंसू आ गए होंगे जो शराब पीने के आदी है । गुटखा गुड़ाखु और तम्बाकू का सेवन करना जिनकी दिनचर्या हो गई है । गांव तो क्या शहर में आज भी बहुतेरे ऐसे मिल जाएंगे जो सुबह बीड़ी, गुटखा ,तम्बाकू और गुड़ाखु का सेवन करने के बाद ही शौचालय जाते है उसके बिना उनके पेट ही साफ नही होता ।ऐसे लोगो को लॉक डाउन किसी बड़ी सजा से कम नही है ।
प्रथम चरण के लॉक डाउन में शुरुआती कई दिनों तक शराब ,गुटखा ,तम्बाकू और गुड़ाखु आसानी से मिलता रहा लेकिन जैसे ही फुटकर विक्रेताओं को थोक बाजार से ये सामान मिलना बंद हुआ तो किल्लत शुरू हो गई उधर पान ठेले आदि बंद करवा दिए गए इसका फायदा उन लोगो ने उठाया जिनके पास थोड़ा बहुत स्टॉक रह गया था और वास्तविक मूल्य से कई गुना ज्यादा कीमत पर गुटखा ,गुड़ाखु और तम्बाकू की पुड़िया बेच अतिरिक्त कमाई की ।
इधर शराब दुकाने बंद होने से शराब प्रेमियों की भी नींद उड़ गई ।सक्षम लोग कुछ दिनों तक हजार रुपये की शराब की बोतल 3,3 हजार रुपये में खरीद कर पीते रहे शहर के कई इलाको में सुनियोजित रूप के ब्लेक में शराब मिलने की सूचना मिलती रही उसके बाद लोग अंग्रेजी की जगह हाथ से बनी गांव की महुए की शराब की खोज करनी शुरू कर दी ।जंगल इलाके में और शहर के आसपास गांवों में पेशेवर लोग हाथ से बनाकर शराब बेचना शुरू किया ।शहर के बहुत लोग अंग्रेजी की जगह देशी लेनाशुरू कर दिए इसी बीच बुधवार को लॉक डाउन में खाली बैठे आबकारी विभाग का अमला शराब पकड़ने कोटा के पास पहुंच तो कुछ लोगो ने अमले पर हमला कर दिया ।
महंगी शराब यदि सम्पन्न लोगों का शौक है तो गरीब गुरबा, मजदूर ,रिक्शा ,हाथ ठेला चलाने वालों तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण के साथ ही शहरी महिलाओं को गुटखा तम्बाकु और गुड़ाखु की लत ने बुरी तरह घेर रखा है। कैंसर का सबब बन चुके ये उत्पाद से मोह त्यागना इतना आसान नही है लेकिन इसके निर्माताओ ने इन उत्पाद के जरिये करोड़ो की कमाई की और कर रहे है ।
गुड़ाखु की लत ऐसी कि धारा 144 का उल्लंघन कर दर्जनों महिलाएं तोरवा बस्ती में टूट पड़ी क्योकि एक महिला मुफ्त में गुड़ाखु की डिबिया बांट रही थी। गुड़ाखु का सेवन करने की आदी महिलाएं गुड़ाखु लेने बड़ी संख्या में पहुंच गई । शिकायत होने पर तोरवा पुलिस ने गुड़ाखु बांटने वाली समेत कई महिलाओं के खिलाफ जुर्म दर्ज कर लिया। नशे के आदी तमाम लोग इस बात से परेशान है कि अब 3 मई तक कुछ भी नही मिलने वाला है । लॉक डाउन का हर हालत में पालन करना है । शराब तो शायद 21 अप्रेल से मिल जाएगी मगर अभी इसमें संदेह है मगर गुटखा ,गुड़ाखु और तम्बाकु तो दुकाने खुलने पर ही मिलेंगे और ये दुकाने फिलहाल 3 मई तक तो बंद ही रहेंगे । लॉक डाउन यदि फिर आगे बढ़ाना पड़ जाए तब तो और आफत ही होगी मगर जान बचानी है तो आगे भी अमल करनी पड़ेगी ।