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April 5, 2025 6:26 am

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चला गया सपनों का सौदागर ,छग के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने दोपहर 3.30 बजे प्रदेश वासियों से ली अंतिम बिदाई ,पूरे राज्य में शोक की लहर ,मुख्यमंत्री विधानसभा अध्यक्ष समेत तमाम नेताओ ने शोक जताया ,गौरेला में होगा अंतिम संस्कार

रायपुर। सपनो का सौदागर नही रहे । जी हां अपने को सपनों का सौदागर कहने वाले ठेठ छतीसगढ़ी और छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी का 74 साल की उम्र में आज दोपहर 3.30 बजे निधन हो गया । उन्हें हार्ट अटैक आने के बाद श्री नारायणा अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहां 20 दिन तक चले इलाज के बाद आज शुक्रवार को फिर कार्डियक अरेस्ट आने के बाद उन्हें नही बचाया जा सका। उनके निधन की खबर आते ही पूरे प्रदेश में शोक की लहर फैल गई ।

श्री जोगी के निधन को प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ,विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरण दस महंत पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ,नेता प्रतिपक्ष धरम लाल कौशिक समेत तमाम नेताओ ने दुख प्रगट किया है । स्व श्री जोगी के पुत्र अमित जोगी ने ट्विटर पर निधन की जानकारी देते हुए बताया कि स्व श्री जोगी का अंतिम संस्कार गृह ग्राम गौरेला में कल किया जाएगा ।

अजीत जोगी को जिस समय उन्हें हार्ट अटैक आया, तब वो गंगा इमली खा रहे थे। इमली का बीज उनके गले में फंस गया था। अजीत जोगी शुरु से अस्पताल में कोमा में थे और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था।अजीत जोगी का जन्म 29 अप्रैल 1946 में बिलासपुर के पेंड्रा में हुआ था। उनका पूरा नाम अजीत प्रमोद कुमार जोगी है। उन्होंने भोपाल से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके कुछ दिन रायपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में अध्यापन का काम किया। जोगी 1968 में UPSC में सफल हुए और IPS बने थे। दो साल बाद ही वे IAS बन गए। वो रायपुर, शहडोल और इंदौर में 14 साल तक कलेक्टर रहे हैं।

मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सुझाव पर राजनीति में आए। 1 नवंबर 2000 को जब छत्तीसगढ़ राज्य बना, तब जोगी छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल 9 नवंबर 2000 से 6 दिसंबर 2003 तक था। महासमुंद लोकसभा सीट से वो पहली बार सांसद का चुनाव जीते थे, 2004 से 2009 तक वे सांसद रहे। रायपुर में कलेक्टर थे, उस समय राजीव गांधी के संपर्क में आ गए। जब राजीव गांधी रायपुर रुकते थे तो एयरपोर्ट पर जोगी खुद उनकी मुलाकात करने के लिए पहुंच जाते थे। बताया जाता है कि इस खातिरदारी ने उन्हीं राजनीतिक की टिकट दिला दी। उन्होंने काफी संघर्ष के बाद यह मुकाम हासिल किया था।जोगी काफी लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी में रहे, उसके बाद 2016 में कांग्रेस पार्टी छोड़कर उन्होंने 2018 में अपनी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जेसीसी-जे) नाम से अलग पार्टी बना ली थी । विधानसभा चुनाव में वे सपत्नीक चुनाव जीते मगर उनकी बहू ऋचा जोगी हार गई । हालांकि उनके 5 विधायक चुनाव जीत कर आये मगर पार्टी में लगातार टूटती गई और अनेक भरोसेमंद लोग जो कांग्रेस छोड़कर उनके साथ आ गए थे जल्दी ही एक एक कर पार्टी छोड़ते गए । अब उनकी पार्टी को संभालने की जिम्मेदारी उनके पुत्र अमित जोगी के ऊपर होगी ।

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