बिलासपुर.।
सदभावना द्वारा परंपरा अनुसार छत्तीसगढ़ी संस्कृति का पर्व कमर छठ पूजा (हलषष्ठी व्रत) बड़े सादगी एवं विधि विधान से ग्रामीण महिलाओं के साथ मनाया गया।
संतान की लंबी उम्र एवम् उनकी सुख समृद्धि की कामना से दिनभर निर्जला व्रत रखकर पूजन के बाद बिना हल लगे अन्न से व्रत का पारायण करने एवं व्रत पूजन के बाद माताएं द्वारा अपनी संतान को पोता लगाकर शुभ आशीष देने की परंपरा ग्राम छतौना जरहागांव स्थित बनिया बाड़ा में बड़े श्रद्धा भाव से करोना काल की गंभीरता को देखते हुए सादगी से मनाया गया। गांव की महिलाएं पूजन स्थल में प्रतीकात्मक कुआं स्वरूप पूजन के लिए तलाब और पैठू के रूप में बड़े श्रद्धा भाव से उसे काशी फूल से सजाकर सभी प्रकार की पूजन सामग्री अर्पित कर पूजन करती है। पूजन में ग्वालिन की कथा का श्रवण किया गया । पंडित गजाधर पांडेय महाराज धर्मपुरा वाले द्वारा विधि विधान से व्रती महिलाओं को पर्याप्त दूरी बना कर पूजन करने की समझाइश देते हुए कथा का वाचन किया गया। इस अवसर पर भैंस के दूध से बने दही घी के साथ ही पसहर चावल को जलहरी में अर्पित किया गया। साथ ही व्रती महिलाएं माताएं द्वारा बच्चों को प्रसाद स्वरूप मिट्टी के पात्र में लाई मौहा नारियल आदि का प्रसाद वितरित किया गया। पूजन पश्चात जलहरी में एकत्र काशी के फूल पूजन सामग्री आदि को पूरे भक्ति भाव से बनिया तालाब में विसर्जित किया गया।
इस वर्ष करोना के चलते किसी प्रकार के वाद्य यंत्र व सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि का आयोजन नहीं रखा गया किंतु पूरे श्रद्धा भाव एवं परंपरा अनुसार बच्चों को आशीर्वाद देने एवम् बड़े बुजुर्गों से आशीर्वाद लेने की परंपरा को भी सीमित ही सही अनवरत प्रयास किया गया। सदभावना द्वारा बच्चों में टाफी एवं प्रसाद वितरण भी किया गया एवं भाईचारे एवं सद्भावना को बढ़ाने की जो परंपरा है, उसे ग्रामीण परंपरा में और मजबूत करने सद्भावना महिला समिति संयोजिका श्रीमती अल्का अग्रवाल के संयोजन प्रेमवती, रोशनी, लखनी, इंद्रानी, सरिता, उमा, तिजिया, कीर्ति, रानी , भूरी परेटन, गुड़िया, छैला, रेखा, दुर्गा, अनीता, राम कुमारी, सुनती लक्ष्मी, जानवी, रानी यादव, सहोदरा आदि ने विधि विधान से पूजा की। उक्ताशय की जानकारी सदभावना संयोजक राजीव अग्रवाल द्वारा दी गई।