बिलासपुर ।कोरोना अब सुरसा की मुहँ की तरह बढ़ता ही चला जा रहा हैं। आम जनता के साथ डॉक्टर्स, पुलिस, पत्रकार व बैंकर्स भी अब असुरक्षित हो गए हैं। विगत दिनों इन वर्गों के गुमनाम सिपाही भी कोरोना काल के ग्रास बन चुके हैं।
बैंकर्स क्लब के समन्वयक ललित अग्रवाल का मानना है कि अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए अनलॉक करना सरकार की मजबूरी हैं। लेकिन इसका मतलब यह कतई नही की अब चिंता की कोई बात नहीं। अकेले बिलासपुर में हजारों की तादाद में कोरोना पीड़ित मिल जायेग। ऐसे में सामुदायिक संक्रमण को रोकने हेतु हर किसी को डिजिटल प्लेटफार्म में जाना ही होगा। सब्जी बाजार, फल ठेले, किराना दुकान, दवाई दुकान, अस्पताल,अन्य दुकान, एटीएम व बैंक हर जगह नगदी का लेनदेन होता हैं। कब कौन किस तरह संक्रमित हो जाये कहा नही जा सकता। यदि हमें सामुदायिक संक्रमण को रोकना हैं तो हाथ धोने, मास्क धारण, सोशल डिस्टेंस के साथ डिजिटल लेन देन अपनाना ही होगा। भीम यूपीआई, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाईल बैंकिंग आज कॉमन हो चुके हैं। वर्तमान में बिना लक्षणों के मरीजों की संख्या में इजाफा होने से उस व्यक्ति के नगदी नगद लेनदेन से सम्भवतः कोरोना उन करेंसी के साथ अन्य को संक्रमित कर सकते हैं।अतः सभी से निवेदन किया जाता हैं कि प्रधानमंत्री की डिजिटल इंडिया अपील को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित रूप से डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देवे। छोटे लेनदेन में कोई भी शुल्क नही लगता हैं। यदि आप रुपे कार्ड का नियमित इस्तेमाल करते है तो दो लाख रुपये तक बीमा के अधिकारी भी हो जाते हैं। उसी तरह शासन की जीवन ज्योति व जीवन सुरक्षा योजना में मात्र रु 330/- व रु 12/- वार्षिक में दो दो लाख का जीवन व दुर्घटना बीमा भी उपलब्ध हैं। संक्रमितों
कोरोना के कैशलेस इलाज हेतु न्यूनतम प्रिमियम में कोरोना कवच स्कीम का भी उपयोग किया जा सकता हैं। कोर बैंकिंग के युग मे ग्राहक किसी शाखा विशेष का ना होकर बैंक का होता हैं।जिले में स्टेट बैंक, पंजाब बैंक, सेंट्रल बैंक आदि कुछ बैंकों की शाखाओं में किसी पॉजिटिव के आने से अथवा किसी शाखा में कोई स्टॉफ अथवा ग्राहक कोरोना संक्रमित होने की जानकारी हो तो अतिआवश्यक होने पर सुरक्षा की दृष्टि से उस शाखा के बजाय उसी बैंक की अन्य शाखा से लेनदेन किया जा सकता हैं।
सावधानी ही सुरक्षा है ।