
बिलासपुर । मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के पद को लेकर अब अनेक रहस्य उजागर होते जा रहे हैं संयुक्त संचालक स्वास्थ्य डॉक्टर प्रमोद महाजन अभी तक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के पद को भी संभाल रहे थे लेकिन जिस तरह आनन-फानन में रतनपुर में पदस्थ चिकित्सक को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर अस्थाई तौर पर पदस्थ किए जाने का आदेश हुआ है और आनन-फानन में डॉ अनिल श्रीवास्तव ने अवकाश के दिन ही पदभार ग्रहण कर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का शासकीय वाहन लेकर महामाया मंदिर में मत्था टेकने पहुंच गए उससे यह स्पष्ट होता है कि डॉ अनिल श्रीवास्तव को पदभार संभालने की बहुत जल्दी थी लेकिन अनेक गंभीर आरोपों से घिरे डॉक्टर अनिल श्रीवास्तव को डॉ प्रमोद महाजन ने रतनपुर स्थानांतरित कर उन्हें रिलीव कर दिया था लेकिन डॉक्टर श्रीवास्तव ने रतनपुर में पदभार ही ग्रहण नहीं किए और यहां मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर आनन-फानन में प्रभार ले लिए ।उनके इस आदेश में आश्चर्य तो यह है कि विभाग ने सामान्य प्रशासन विभाग से एनओसी लिए बगैर ही आदेश निकाल दिया और प्रथम श्रेणी अधिकारी डॉ प्रमोद महाजन की जगह द्वितीय श्रेणी के अधिकारी अनिल श्रीवास्तव को मुख्य चिकित्सा अधिकारी का पद दे दिया गया इस पर आगे चलकर दिक्कतें आ सकती हैं।
सवाल तो यह उठता है कि आरोपों से घिरे द्वितीय श्रेणी के अधिकारी प्रथम श्रेणी के राजपत्रित अधिकारी समझे जाने वाले चिकित्सकों पर
हुकुम चलाएंगे?

यह अजीबोगरीब स्थिति है कि स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों के चलते बिलासपुर में स्वास्थ्य विभाग अब अखाड़े बनने की दहलीज पर हैं। जिले के 25 से अधिक पात्र प्रथम श्रेणी के डॉक्टरों को दरकिनार कर द्वितीय क्लास के और आरोपो से घिरे चिकित्सा अधिकारी को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कैसे बना दिया गया? इन सवालों के जवाब घूम फिर कर “विजय पताका” . के तरफ पहुंच जाता है । वहीं कथित सीएमओ का एकतरफा प्रभार ग्रहण कर लेने से शासन के नियमो की अनदेखी भी साफ नजर आने लगी है ।…
छत्तीसगढ़ शासन लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के आदेश दिनांक 24 जून 2022 कमांक एफ 1-39/2022/सत्रह/एक जारी कर अनिल कुमार श्रीवास्तव, चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, रतनपुर को अस्थायी रूप से आगामी आदेश तक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला बिलासपुर का प्रभार सौंपा है। इस आदेश के परिपालन में आनन फानन में डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का एकतरफा कार्यभार अवकाश के दिन ही शनिवार को ग्रहण कर लिया है। सोशल मीडिया में इसकी खबरें और फोटो वायरल हो रही।रतनपुर के कुछ लोग माला पहना कर स्वागत भी कर रहे है ।
वहीं दूसरी ओर राजेन्द्र सिंह गौर अवर सचिव छत्तीसगढ़ शासन लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के हस्ताक्षर से जारी आदेश दिनांक 24 जून 2022 कमांक एफ 1-39/2022/सत्रह/एक पर भी सवाल उठने लगे हैं।. जानकारों की माने तो संयुक्त संचालक और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रमोद महाजन जिले में स्वास्थ्य महकमें के सबसे वरिष्ठ प्रथम श्रेणी चिकित्सा अधिकारी हैं। कोरोना काल में उनके योगदान को सब याद करते है ।प्रथम श्रेणी चिकित्सा अधिकारी को प्रभार से हटाने व ट्रांसफर करने से पहले सामान्य प्रशासन विभाग की अनापत्ति की जरूरत होती है। वहीं आदेश जारी करने के पहले सामान्य प्रशासन विभाग छत्तीसगढ़ शासन से अनुमति नहीं लेने की जानकारी मिली है। ऐसे में आदेश की वैधता पर ही सवाल उठने लगे हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वारथ्य अधिकारी कार्यालय में अटैच डॉक्टर अनिल श्रीवास्तव को सीएमएचओ डॉक्टर महाजन ने बीते दिनों रिलीव कर दिया था। इसके बाद डॉ. श्रीवास्तव ने अपने मूल पदस्थापना वाली सीएचसी रतनपुर में ज्वाइनिंग ही नहीं दी है। ऐसे में प्रकिया का पालन किए बगैर सीएमएचओ का प्रभार ले लेना तय प्रावधानों के तहत क्या विपरीत नही है?
यह भी उल्लेखनीय है कि डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव से शासन को लाखों रुपए की वसूली कर जीवन दीप समिति के खाते में जमा करानी है। डॉ. श्रीवास्तव लंबे समय तक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रतनपुर और बाद में सामुदायिक स्वारथ्य केन्द्र, रतनपुर के प्रभारी चिकित्सक थे उस दौरान गंभीर वित्तीय अनियमितता करने और सेवा में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगे थे।
स्थानीय निधि संपरीक्षक अंकेक्षण 2006 से 2018-19 तक की हुई आडिट में लाखों रुपए की अनियमितता साबित होने पर राशि की वसूली कर जीवनदीप समिति में जमा कराने का आदेश भी जारी हुआ था। वहीं पोस्ट मार्टम करने के बाद रुपए नहीं देने पर शव के चिरे गए हिस्से की सिलाई किए बगैर लाश को परिजनों को सौंप देने और इलाज में लापरवाही करने से एक बच्चे की मौत जैसे गंभीर आरोप लगे थे. पोस्ट मार्टम वाला मामला तो कांग्रेस के एक विधायक ने विधानसभा में उठाया था मगर उन सारे आरोपों की जांच और कार्रवाई होने के बजाय उन्हें सी एम ओ पद के ताज से नवाजा गया है । .
इस पूरे खेल में एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी की उच्चस्तरीय कोशिश और सौदेबाजी होने की बात कही जा रही. वर्ना जिस डाक्टर को चंद दिन पहले मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्य अधिकारी डाक्टर महाजन ने अपने कार्यालय से लापरवाही बरतने पर प्रभार से हटा कर रतनपुर भेज दिया गया था उस आरोपों से घिरे डाक्टर को सी एम ओ प्रभारी बना देना कई सवाल खड़े करता है।इस पूरे मामले से स्पष्ट होता है कि आरोप जितने ज्यादा गंभीर होंगे उतने ही ज्यादा मलाईदार पोस्ट मिलने की गुंजाइश है हालांकि पद स्थापना को लेकर उठाए गए ज्वलंत और गंभीर शिकायतों पर शासन यदि ध्यान देगी तो संभव है कुछ उलटफेर हो सकती है ।