
आज जिनका मोक्ष दिवस है और जिन्हे श्रीराम ने मोक्ष दिलाया था वही लंकाधिपति पराक्रमी त्रिलोक विजेता,शिव तांडव स्त्रोत के रचयिता ,चारो वेदो के ज्ञाता सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषी – औषधियों के ज्ञाता, वाद्य यंत्रो के रचयिता, जल प्रबंधन के रचयिता, कुशल शासक – तेजस्वी पंडित , शिवभक्त महाराज़ लंकेश दशानन रावण का चेहरा( जो टी वी सीरियल में देखा करते थे) आज बार बार आंखों के सामने आ रहा था ,लगता था कुछ कहने वाले है,आपबीती बताना चाहते है
सोचा एक इंटरव्यू तो बनता है सो पुलिस ग्राउंड में जा पहुंचा तब तक उन्हे मोक्ष दिलाने शहर के नेता नही पहुंचे थे।उनके आने में काफी वक्त था सो पहुंच गया और उनसे अनुरोध किया कि हे लंकाधिपति आप पर जो बीत रही है उसे तो आप ही महसूस कर सकते है मेरे बस की बात नही है लेकिन आपकी पीड़ा को मैं जनता तक जरूर पहुंचा सकता हूं। हो सकता है आपकी पीड़ा सुन आपको ब्राम्हण देवता मानते हुए अगले साल से जनता का मन बदल जाए।मेरी बात सुनकर क्रोध से तिलमिलाए लंकाधिपति ने मेरी ओर देखा तो मैं भी डर गया और वापस लौटने लगा तो उन्होंने चिल्लाया रुक जा और इधर आ… मेरी कुछ हिम्मत बंधी और पहुंच गया उनके पास ।उन्होंने कहा वैसे तो मैं इंटरव्यू के सदा खिलाफ रहा और इसीलिए पूरे देश दुनिया के लोग मुझे हल्के में ले लिए है मगर आज सोशल मीडिया का जमाना है किसी झूठ को सत्य में बदलना है तो सोशल मीडिया में उसे वायरल कर दो ।अब आपके प्रधानमंत्री मोदी जी की ले लो सोशल मीडिया में उनके करोड़ों फालोवर है ।उनकी छोटी से छोटी बात भी सोशल मीडिया में आते ही ब्रम्ह वाक्य हो जाता है इसलिए मैं भी सोशल मीडिया में अपनी बात रखना चाहता हूं। वैसे भी भगवान श्रीराम से मेरी हुई लड़ाई और उस समय की घटनाओं को यथार्थ में कौन जानता है।उस समय के सारे लोग मर खप गए है ।जिंदा गवाह कोई नही बचा इसलिए मैं सारी घटनाओं को तोड़मरोड़ कर भी बताऊंगा तो उसे झूठा बताने वालों को सबूत बताना होगा ।आप लोग जो भी मेरे और श्रीराम के बारे में जानते हो वह सब किताबी ज्ञान है ।उन्होंने कहा श्रीराम ने मुझे मारकर मोक्ष प्रदान कर दिया है इसके बाद भी लोग मुझे आज के दिन हर साल जिंदा करके कुछ ही घंटो में मार देते है मैने आखिर किसका क्या बिगाड़ा है ?उन्होंने कहा हमारे जमाने में ऐसी टूट पूंजिया राजनीति नही होती थी हम पक्ष विपक्ष और दुश्मन देश के नेताओ को भी आदर सम्मान देते थे मगर यहां तो अलग ही किस्म की ओछी राजनीति राजनीति चल रही है। उन्होंने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि पिछले 20 साल तक एक ही आदमी मुझे विजयदशमी के दिन मारता था लेकिन अब मुझे मारने के लिए पूरे 1 दर्जन लोग आ रहे हैं। मुझे दशानन कहते हैं अर्थात मेरे 10 सिर हैं और मारने वाले दर्जनभर नेता है मेरे तो समझ में ही नहीं आ रहा है कि मैं इन लोगों को क्या समझाऊं। भाजपा के सरकार में मुझे मारने के लिए एक ही मुख्य अतिथि होता था भले ही समारोह के कारण राम सीता ,लक्ष्मण और हनुमान की झांकी के साथ पुलिस ग्राउंड में हजारों की संख्या में भीड़ रहती थी लेकिन इस सरकार ने दर्जन भर लोगों को मुझे मारने के लिए भेज दिया क्या एक ही नेता काफी नहीं था? मुझे प्रकांड पंडित ,त्रिलोक विजेता सहित मेरे नाम के आगे कई गुणों के ज्ञाता से संबोधित किया गया है लेकिन बड़े बड़े ज्ञाता यह सब भूल जाते है ।कई सौ साल पुराने अहंकारी राजा का दंड मुझे दिया जा चुका है फिर भी मुझे खुशी है कि साल में एक बार मुझे श्री राम के साथ ठीक उसी तरह याद किया जाता है जैसे 2 अक्तूबर को महात्मा गांधी के साथ उसके हत्यारे नाथू राम गोडसे को उनके अनुयाई याद करते है ।गांधी जी नही होते तो गोडसे को कौन याद करता ।फर्क सिर्फ इतना ही है कि मुझे श्रीराम के हाथो मोक्ष मिलना था सो मिल गया फिर भी लोग मुझे याद करते है जबकि गोडसे को हत्यारे के रूप में याद करते है । उन्होंने कहा बिलासपुर शहर और यहां के लोग अच्छे है मगर यहां की राजनीति बेहद गंदी है यहां के लोगो को गंदगी फैलाने वाले नेताओ को सबक सिखाना चाहिए।अब तो लोकतंत्र में राजा महाराजा नही बल्कि जनता सबक सिखाती है । राजा महाराजा भी जनता की कृपा पर ही राजनीति करते है ।जनता जब चाहे उन्हे निपटा देती हैं जैसे 20 साल के एक राजा को यहां की जनता ने निपटाया ।बिलासपुर की जनता जरूरत से ज्यादा जागरूक है ।लंकाधिपति से बात चल ही रही थी कि नेताओ के काफिले के आने की सूचना मिली तो लंकाधिपति ने निवेदन किया कि मेरी बातों को मेरी पीड़ा को सोशल मीडिया के मार्फत जरूर पहुंचाना ।उनकी बातें सुनकर मेरा भी दिल पसीज गया और रावण दहन कार्यक्रम में शामिल हुए बिना ही मैं पुलिस ग्राउंड से बाहर निकल आया ।