बिलासपुर। तो लो भई भाजपा ने आखिरकार प्रत्याशियों की दूसरी अधिकृत सूची की घोषणा कर दी है। यह वही सूची है जिसे भाजपा के तमाम नेता फर्जी बताते नहीं थक रहे थे और इसी फर्जी सूची को लेकर अधिकांश विधानसभा क्षेत्र में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच बवाल मचा हुआ था मगर अब वह सूची पार्टी के वाशिंग मशीन से धुलकर असली हो गई है। भाजपा कार्यकर्ताओं की और अनुशासन वाली पार्टी है ऐसा भाजपा के बड़े नेता बार-बार कहते आए हैं और यही अनुशासन वाली पार्टी के कार्यकर्ता सूची का भारी विरोध करते हुए पहली बार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के निवास और एकात्म परिसर का घेराव तक कर दिया और बाहरी प्रत्याशी का विरोध करते हुए स्थानीय प्रत्याशी की मांग करते रहे लेकिन भाजपा के नेता सूची को फर्जी बताते रहे और यह भी कहते रहे कि पार्टी के प्रत्येक कार्यकर्ता को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है लेकिन यह तरीका सही नही है। प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने तो विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं को हड़का तक दिया था ।आश्चर्य तो इस बात का है कि अमित शाह ,ओम माथुर ,नितिन नवीन,अजय जामवाल समेत पार्टी संगठन के और भी बड़े नेता योग्य प्रत्याशी की तलाश में 6 माह तक पूरे प्रदेश की तफरी करते रहे और बड़ी बड़ी बैठक कर कार्यकर्ताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाते रहे ।मेरा बूथ मजबूत का संकल्प दिलाते रहे ।परिवार वाद का घोर विरोध करने वाले नेताओं को क्या सूझा कि एक ही परिवार के दो लोगो पर टिकट कुर्बान कर दिया ।जी हां हिंदू सम्राट कहे जाने वाले स्व दिलीप सिंह जूदेव के बेटे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव को कोटा से और स्व जूदेव के बड़े पुत्र की धर्मपत्नी यानि बहु संयोगिता सिंह जूदेव को चंद्रपुर से प्रत्याशी घोषित किया गया है।ठाकुरों को टिकट देने के चक्कर में बेलतरा के विधायक बेचारे रजनीश सिंह की टिकट ही खतरे में पड़ गई है। पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिन लोगो को टिकट देने का खुले आम विरोध किया था पार्टी ने उन्ही लोगो को प्रत्याशी घोषित किया है इसका सीधा सा मतलब है पार्टी को कार्यकर्ताओं की पसंद से कोई मतलब नहीं है क्योंकि भाजपा विश्व की सबसे पार्टी जो है।पार्टी के नेताओं को गुमान है कि अब प्रत्याशी को कार्यकर्ता नही बल्कि जनता जिताती है ।आज जारी पूरी सूची से लगता है कि पार्टी प्रदेश के उन भाजपा नेताओ के समक्ष सरेंडर हो गई है जिनके कारण पिछले चुनाव में पार्टी की दयनीय हार हुई थी। भाजपा के बड़े नेताओं को यह भी शायद गुमान हो गया है वे जिन लोगो को प्रत्याशी बना रहे है उनको अन्य राज्यो से आए एक सौ से भी ज्यादा विधायक और कई ऐसे केंद्रीय राज्य मंत्री जिन्हे जनता जानती तक नहीं ,शायद पार्टी कार्यकर्ता भी नही ,वही जीता कर लायेंगे ।कार्यकर्ताओं के भरोसे चुनाव नही जीता जा सकता ।