बिलासपुर । जल संसाधन विभाग में नियम विरुद्ध प्रभार वाद के एक मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए एकतरफा रिलीव किए गए एक कार्यपालन अभियंता की याचिका पर उसे पदस्थ स्थान पर कार्य करने की छूट दी है साथ ही उसे विभाग के समक्ष अभ्यावेदन देने का आदेश दिया है जिसका निराकरण 45 दिनों के भीतर करने कहा गया है । उल्लेखनीय है CBN 36 ने सप्ताह भर पूर्व जल संसाधन विभाग में प्रभार वाद हावी होने और वरिष्ठों की उपेक्षा कर कनिष्ठ अभियंताओं को प्रमोशन दिए जाने की खबर प्रकाशित की थी ।इसी तारतम्य में विभाग द्वारा कुछ दिनों पूर्व कई अभियंताओं का तबादला आदेश जारी गया था जिसमे रायपुर डिविजन में पदस्थ कार्यपालन अभियंता जे आर पटेल जो इसी वर्ष दिसंबर में सेवानिवृत होने वाले है ,का तबादला मुख्य अभियंता कार्यालय अटल नगर रायपुर में कर दिया गया था और उनकी जगह एक एस डी ओ दीपक देव जो रायपुर में ही पदस्थ है को प्रभारी कार्यपालन अभियंता का प्रभार के साथ ही एस डी ओ का भी कार्य करने आदेशित किया गया था (देंखे आदेश) इस आदेश के खिलाफ पीड़ित कार्यपालन अभियंता जे आर पटेल ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी ।याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने जो आदेश दिया है उसके मुताबिक विभाग का उक्त तबादला आदेश स्वमेव निरस्त हो गया है । कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए विभाग को याचिका कर्ता के अभ्यावेदन पर 45 दिनों के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है साथ ही दूसरे अधिकारी को चार्ज नहीं सौंपने की स्थिति में याचिका कर्ता को काम करने की छूट दी गई है । याचिका कर्ता जे आर पटेल ने अपनी याचिका में बताया कि कार्यपालन अभियंता के पद पर उनकी पद स्थापना अक्टूबर 2021 में हुई थी लेकिन 3 साल का कार्यकाल पूरा किए बिना ही उसका स्थानांतरण कर दिया गया। इसके अलावा वे इसी वर्ष दिसंबर में सेवानिवृत हो रहे हैं ऐसे में उनका तबादला किया जाना न्याय संगत नहीं है ।हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए याचिका कर्ता को दो दिनों के भीतर अपने विभाग के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने और विभाग को इस अभ्यावेदन का 45 दिनों के भीतर निराकरण करने के निर्देश दिए हैं साथ ही याचिका कर्ता के स्थान पर एसडीओ दीपक देव को चार्ज नहीं सौंपने की स्थिति में याचिका कर्ता को काम करने की छूट भी दी गई है।