बिलासपुर । महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में राज्य शासन की स्वीकृति और राशि मंजूर हो जाने के बाद भी भवन , शौचालय और पेयजल सुविधा के लिए कार्य प्रारम्भ नही हो पाया है । विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने प्रदेश के सभी कलेक्टर्स को पत्र लिख अप्रारम्भ कार्यों को शीघ्र प्रारम्भ करने के लिए कहा है ।
प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रो के लिए भवन , शौचालय तथा पेयजल व्यवस्था के लिए राज्य शासन की स्वीकृति और धन राशि मंजूरी के बाद भी निर्माण कार्य शुरूं नही किये जा सके है । जानकारी के मुताबिक 12 हजार रुपये की दर से आंगनबाड़ी केंद्रों में शौचालय निर्माण कराने राशि मंजूर की गई मगर पूरे प्रदेश में 3027 शौचालयों का निर्माण कार्य प्रारम्भ ही नही किया गया है इसमें बिलासपुर जिले में 460 और कोरबा जिले में 461 शौचालय प्रारम्भ नही हुए है (देखे पूरे प्रदेश के जिलो में अप्रारम्भ शौचालयों की सूची )
इसी तरह प्रत्येक आंगनबाड़ी में 10 हजार रुपये खर्च कर पेयजल की व्यवस्था करने राशि मंजूरी के बाद भी पूरे प्रदेश के 785 आंगनबाड़ी केंद्रों में पेयजल की व्यवस्था नही हो पाई है इसमें कोरबा जिले में 186 और बस्तर जिले में 199 आंगनबाड़ी शामिल है ।(देंखे पूरे जिलों की सूची )
आंगनबाड़ी केंद्रों में मनरेगा की राशि से 5 लाख रुपये और 1.45 लाख रुपये विभागीय निधि से खर्च कर आँगनबाड़ी भवन भवन राशि स्वीकृति के बाद भी पूरे प्रदेश में 3560 भवनों का निर्माण प्रारम्भ नही हो पाया है ।इसमें बलरामपुर जिले में 264 ,बिलासपुर जिले में 215 ,जशपुर जिले में 405 ,कांकेर जिले में 197 ,कोंडागांव जिले में 368 कोरबा जिले में 304 ,रायगढ़ जिले में 281 और सरगुजा जिले में 344 भवनों का निर्माण शुरू नही किया जा सका है ।
महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने सभी कलेक्टर्स को पत्र लिख कर कहा है कि प्रदेश में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान 2 अक्टूबर 19 से शुरू किया जा चुका है । बच्चों के सर्वागीण विकास एवं राज्य में कुपोषण को न्यनतम दर पर लाने आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पूर्ण अधोसंरचना आवश्यक है इसलिए अप्रारम्भ कार्यो को अतिशीघ्र प्रारम्भ कराएं