बिलासपुर । । पुलिस से कभी मत उलझिए क्योंकि पुलिस सांप को रस्सी और रस्सी को सांप बनाने में माहिर होती है । मस्तूरी पुलिस का भी कुछ ऐसा ही जलवा है । क्षेत्र में गांजा ,जुआ ,अवैध शराब के खिलाफ पुलिस ने ताबड़तोड़ करवाई की है मगर अन्य अपराध में कोई कमी आई हो ऐसा नहीं लगता ।
मस्तूरी जनपद पंचायत में आर्थिक गड़बड़ियों की कहानियां मुख्यालय से शुरू होकर हर गांव के पंचायत कार्यालय तक है। सरकार की शायद ही कोई ऐसी योजना शेष होगी जिसमें आर्थिक अनियमितता ना हुई हो। अब इसी तर्ज पर वहां का थाना भी चल पड़ा दिखाई देता है। क्षेत्र में पशु तस्करी, जुआ, गांजा और अवैध शराब का धंधा ऐसा काकस बन गया है जिस पर कार्यवाही होती तो दिखाई देती है पर सच पता नही चलता है। पुलिस की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। किन्तु अवैध शराब बिक्री के मामले कम नही होते। आश्चर्य की बात यह है कि अवैध शराब के धंधे पर कारवाई करने में आबकारी विभाग से अधिक पुलिस की रुचि है और छापामारी भी लगातार पुलिस करती है। अनेक मामले भी दर्ज हुए है और काफी मात्रा में शराब ,गांजा भी बरामद किया गया मगर बताते है कि शराब के धंधे को संचालित करने वालों को छुटने का रेट पता है। टिकारी, किरारी, मुड़पार, खुर्सीपार जैसे दर्जनों गांव का उदाहरण दिया जा सकता है। एक पाव शराब बाजार में 80 तो लाली 100 की है। 10 पाव शराब पकड़ी गई, छुटने का दाम 15 हजार है। 10 लीटर अर्थात 40 पाव का आरोपी 25 हजार देकर छुटता है। 20 लीटर शराब अर्थात 80 पाव 30 हजार में छुट जाती है। एक जगह तो 10 लीटर तस्करी के आरोपी को 30 हजार में छोड़ा गया था। ऐसी दर्जनों कहानी क्षेत्र के लोग बताते रहते है किन्तु कोई भी व्यक्ति कभी भी लिख कर ना तो शिकायत करता है, ना ही कैमरे के सामने कबूल करता है। जुआ यदि बड़े गिरोह में पकड़ा जाए तो व्यक्ति देख कर रकम तय होने की बात भी कही जाती है। क्षेत्र में जुआ संचालन के दो ध्रुव बन गए है। एक सीपत के जंगल में है तो दुसरा भदौरा की जमीन पर किन्तु संचालन बाज किरारी का बताया जाता है। गांजा का धंधा तो और भी धुएं के पीछे है। एक तरफ महाराष्ट्र में 50-50 ग्राम की पुड़िया रखने वाले मुंबई एनबीसी की पकड़ में है। वहीं मस्तुरी में 10 किलो 500 ग्राम गांजा आटो में उड़ीसा से आ जाता है, और इसे मात्र एक आदमी उड़ीसा से लेकर बिलासपुर तक आ जाता है, और मस्तुरी थाने की गिरफ्त में आ जाता है। इसे उड़ीसा के ऑटो ड्राइवर का हुनर कहे कि वह 10 किलो 500 ग्राम गांजे की तस्करी अकेला कर लेता है, या मस्तुरी खाकी जो शेष लोगो पकड़ नही पाई, उड़ीसा से बिलासपुर तक का सफर आॅटो में अकेले बात को पचाने के लिए निश्चित ही आर्युवेदिक दवा की जरूरत पड़ेगी। क्षेत्र में इसकी भी कई कहानियां है, ऑटो, ऑटो वालों के बीच विवाद अचानक हुआ या सुनियोजित था, ऑटो में बैठे अन्य लोग कब कहा चले गए एक ही आदमी क्यों पकड़ा गया आदि-आदि पर सुपरकाॅप उतना ही बताते है जितना वे बताना चाहते है। बहरहाल मस्तूरी पुलिस के अनेक कारनामे है तो सफलता के भी अनेक उदाहरण है ।